द फॉलोअप डेस्क
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के रहने वाले 70 वर्षीय हेमंत जैन आज भी अपनी कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। साल 2001 में उन्होंने कुख्यात गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम की जब्त संपत्ति को नीलामी के दौरान खरीदा था। लेकिन 23 साल बीतने के बाद भी उन्हें उस संपत्ति का मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। 19 दिसंबर, 2023 को उनकी रजिस्ट्री तो हो गई, मगर अभी तक वह कानूनी रूप से मालिक नहीं बन सके हैं। हेमंत जैन ने पुलिस और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से मदद की गुहार लगाई है।
दाऊद की संपत्तियों की नीलामी
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने मुंबई के नागपाड़ा थाने के जयराज भाई स्ट्रीट इलाके में स्थित दाऊद इब्राहिम की 23 संपत्तियों को जब्त किया था। इन संपत्तियों में एक 144 वर्ग फीट की दुकान भी शामिल थी, जो चार फीट चौड़ी एक गली में स्थित है। इन संपत्तियों की नीलामी के लिए 2001 में समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किया गया था। इस नीलामी में हेमंत जैन ने 20 सितंबर, 2001 को 144 वर्ग फीट की इस दुकान को दो लाख रुपये में खरीद लिया।
भुगतान के बावजूद कब्जा नहीं मिला
हेमंत ने नीलामी की शर्तों के तहत 20 सितंबर, 2001 को एक लाख रुपये और 28 सितंबर, 2001 को एक लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। हालांकि, भुगतान के बावजूद उन्हें इस संपत्ति पर कब्जा नहीं मिला। हेमंत ने शुरुआत में आयकर विभाग के अधिकारियों से मदद मांगी, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
पीएम कार्यालय को लिखे दर्जनों पत्र
हेमंत जैन ने अपनी शिकायतों को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय को कई दर्जन पत्र लिखे। उन्हें समय-समय पर पत्रों का जवाब भी मिला, लेकिन उनकी संपत्ति की रजिस्ट्री पूरी नहीं हो पाई। 23 साल बाद, 19 दिसंबर, 2023 को रजिस्ट्री तो हुई, लेकिन अभी भी उन्हें मालिकाना हक नहीं मिला है।
न्याय की आस
हेमंत जैन अब भी न्याय की आस लगाए बैठे हैं। उन्होंने पुलिस और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से अपील की है कि उन्हें उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार दिलाया जाए। इस मामले ने सरकारी तंत्र और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर 23 साल बाद भी एक कानूनी खरीदार को उसका हक क्यों नहीं मिल पाया।