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इंदिरा गांधी जिंदा होतीं तो बीजेपी पर बैन लगा दिया होता, बोले अशोक गहलोत

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द फॉलोअप डेस्क:

वरीय कांग्रेस नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि यदि इंदिरा गांधी जैसी नेता आज जिंदा होती तो उन्होंने बीजेपी जैसी पार्टी पर बैन लगा दिया होता। उन्होंने कहा कि आज देश का माहौल खतरनाक है। बीजेपी की सोच क्या है? उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जानबूझकर धार्मिक एजेंडा आगे बढ़ाकर और मुसलमानों को निशाना बनाकर देश को कमजोर करने में लगे हैं।  अशोक गहलोत ने कहा कि बीजेपी ऐसा  इसलिए करती है ताकि नागरिकों को दिखा सके कि वे एक हिंदुत्ववादी पार्टी है। 

 

राहुल गांधी को नेतृत्व सौंपे इंडिया गठबंधन!
अशोक गहलोत ने कहा कि इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन को खुलकर राहुल गांधी को नेतृत्व सौंपना चाहिए। उन्होंने कह कि इंदिरा गांधी के समय, मुकाबला कांग्रेस बनाम बाकी पार्टियों में होताथा। इंदिरा गांधी  के खिलाफ कांग्रेस हटाओ-देश बचाओ अभियान चलाया गया था, लेकिन केवल ढाई साल में जनता उनको वापस सत्ता में ले आई। उन्होंने कहा कि जब जनता को असलियत समझ में आएगी, वे सच में कांग्रेस के साथ खड़े होंगे।  

उन्होंने कहा कि यदि जनता ने कांग्रेस को चुना तो एनडीए और बीजेपी के साथ जुड़ी पार्टियां बीजेपी के खिलाफ हो जाएंगी। मैंने अपनी जिंदगी में कई हालात देखे हैं, लेकिन आज देश का माहौल खतरनाक है। 

क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस पार्टी से है शिकायत
गौरतलब है कि अभी पिछले दिनों इंडिया गठबंधन की बैठक हुई थी। इसमें सपा और आरजेडी जैसे दलों ने कांग्रेस के सामने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की थी। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव का ऐसा मानना था कि कांग्रेस, राज्यों में मजबूत  क्षेत्रीय दलों को अपेक्षित सहयोग नहीं करती। एआईएडीएमके, इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं हुआ। बिहार चुनाव के समय सीट बंटवारे से लेकर चुनावी रणनीति बनाने तक में कांग्रेस ने चुप्पी साधे रखी। झारखंड में कांग्रेस पार्टी का सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ संबंध ठीक नहीं है। ऐसे में कैसे राहुल गांधी को इंडिया गठबंधन का नेतृत्व सौंपा जा सकता है।

क्षेत्रीय दलों में टूट एक बड़ी सियासी चिंता
इस समय देश की सियासत अलग किस्म के झंझावात से गुजर रहा है। महाराष्ट्र में शिवसेना टूटी और अब बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी की बुरी हालत है। उसके 80 में से 58 विधायकों ने बगावत करके अलग गुट बना लिया है। लोकसभा में 28 में से 19 सांसदों ने बगावत करके त्रिपुरा की क्षेत्रीय पार्टी में विलय कर लिया है। बिहार में आखिरकार जेडीयू के हाथ से सत्ता का चाबी चली गई है। 


 

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