द फॉलोअप डेस्क
असम सरकार ने राज्य के डिजिटल 'किसान रजिस्ट्री पोर्टल' में छोटे चाय बागानों को आधिकारिक तौर पर शामिल करके अपने सेंट्रलाइज़्ड एग्रीकल्चरल डेटाबेस का विस्तार किया है। इस प्रशासनिक बदलाव का मकसद बागान सेक्टर में डेटा मैनेजमेंट को आधुनिक बनाना, राज्य के संसाधनों की डिलीवरी को आसान बनाना और स्वतंत्र किसानों के लिए लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक बाधाओं को कम करना है।
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अलग-अलग डिजिटल पहचान नंबर मिलेंगे
अपडेट किए गए सिस्टम के तहत, योग्य छोटे चाय उत्पादकों (STGs) को अलग-अलग डिजिटल पहचान नंबर मिलेंगे। ये ID उन्हें राज्य से सब्सिडी वाले कृषि इनपुट, संस्थागत फाइनेंसिंग और खास तौर पर उनके लिए बनाई गई कल्याणकारी योजनाओं का सीधा और आसान लाभ दिलाएंगी। हालांकि चाय उद्योग पर मुख्य प्रशासनिक नियंत्रण उद्योग विभाग का ही रहेगा, लेकिन अलग-अलग विभागों के बीच इस तालमेल से छोटे किसानों को कृषि विभाग द्वारा मैनेज किए जाने वाले वित्तीय और अन्य लाभ आसानी से मिल सकेंगे।

पहल की तारीफ
इस पहल की तारीफ नॉर्थ ईस्टर्न टी एसोसिएशन (NETA) जैसे क्षेत्रीय उद्योग संगठनों ने की है। असम के कुल ग्रीन लीफ (हरी चाय की पत्ती) उत्पादन में स्वतंत्र छोटे किसानों का बड़ा हिस्सा है और इनकी संख्या 1.33 लाख से ज़्यादा है। सेक्टर के जानकारों का कहना है कि इन बिखरे हुए बागानों को एक ही डिजिटल रजिस्ट्री में लाने से सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ेगी और स्वतंत्र किसानों को शोषण करने वाले बिचौलियों से बचाया जा सकेगा।
