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असम विधानसभा में ऐतिहासिक दिन : भूमि, शिक्षा और राजस्व सुधार से जुड़े 5 विधेयक पास

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द फॉलअप डेस्क 

असम विधानसभा ने बुधवार को अपने बजट सत्र के आखिरी दिन 5 बिल पास किए। इनमें विवादित 'असम भूमि और राजस्व विनियमन (संशोधन) बिल, 2026' भी शामिल था। इस बिल पर "मूल निवासी" की परिभाषा और राज्य के मशहूर हेरिटेज संस्थानों के आस-पास ज़मीन के अधिकारों पर इसके असर को लेकर लंबी बहस हुई। ज़मीन संशोधन कानून के अलावा, सदन ने 'पंजीकरण (असम संशोधन) बिल, 2026', 'भारतीय स्टाम्प (असम संशोधन) बिल, 2026', 'असम भूमि जोत सीमा निर्धारण (संशोधन) बिल, 2026' और 'असम राज्य उच्च शिक्षा परिषद बिल, 2026' को भी मंज़ूरी दी। 

2006 से पहले की तीन पीढ़ियों का सबूत मांगने पर सवाल

सबसे ज़्यादा बहस 'असम भूमि और राजस्व विनियमन (संशोधन) बिल' पर हुई, जिसे संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हज़ारिका ने राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री केशव महंता की ओर से पेश किया था। विपक्ष के सदस्यों ने "मूल निवासियों" को 1971 से पहले असम में रहने वाले परिवारों के तौर पर परिभाषित करने और साथ ही 2006 से पहले की तीन पीढ़ियों का सबूत मांगने के तर्क पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से भ्रम पैदा होता है और इससे संवैधानिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि इस संशोधन का मकसद सीमित है और इसका एकमात्र उद्देश्य असम के मशहूर हेरिटेज और धार्मिक संस्थानों के आस-पास की ज़मीन को बाहरी लोगों द्वारा खरीदे जाने से बचाना है।

पाबंदियां सिर्फ़ नोटिफाइड हेरिटेज ज़ोन पर लागू

सरमा ने सदन को बताया, "यह कोई नया कानून नहीं है। हमने इस विधानसभा में इन प्रावधानों पर पहले भी चर्चा की है और इन्हें मंज़ूरी मिल चुकी है। संशोधन बस यह पक्का करता है कि 250 साल से ज़्यादा पुराने हेरिटेज संस्थानों के आस-पास का इलाका उन समुदायों के पास ही रहे जो ऐतिहासिक रूप से उन संस्थानों से जुड़े रहे हैं। यह किसी धार्मिक अल्पसंख्यक के खिलाफ नहीं है।" उन्होंने साफ किया कि ये पाबंदियां सिर्फ़ नोटिफाइड हेरिटेज ज़ोन पर लागू होंगी। उन्होंने कहा, "आज से बाहरी लोग इन संरक्षित इलाकों में ज़मीन नहीं खरीद सकते। सिर्फ़ खुद को असमिया कहना ही एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता। अगर कोई व्यक्ति तीन पीढ़ियों से उस ज़मीन से नहीं जुड़ा है, तो वह इन नोटिफाइड ज़ोन में ज़मीन नहीं खरीद सकता।" तीन पीढ़ियों वाली शर्त के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस आम नियम को माना है कि एक पीढ़ी 25 साल के बराबर होती है।

 

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