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जिंदगी की जंग हार गए ब्लड कैंसर से पीड़ित युवा पत्रकार नितिन चौधरी

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द फॉलोअप, रांची
पत्रकारिता की दुनिया में अपनी मेहनत, मिलनसार स्वभाव और जुझारू व्यक्तित्व से अलग पहचान बनाने वाले वरिष्ठ पत्रकार नितिन चौधरी जिंदगी की जंग हार गए। ब्लड कैंसर से पीड़ित नितिन चौधरी का दिल्ली में निधन हो गया। लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे नितिन ने आखिरकार जिंदगी की जंग हार दी। उनके निधन की खबर सामने आते ही रांची समेत पूरे पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई। सहकर्मी, मित्र और शुभचिंतक स्तब्ध हैं। किसी को यकीन नहीं हो रहा कि हमेशा मुस्कुराकर मिलने वाला उनका साथी अब उनके बीच नहीं रहा। नितिन चौधरी वर्ष 2024 से ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बीमारी कठिन थी, लेकिन नितिन उससे कहीं ज्यादा मजबूत थे। उन्होंने बीमारी का डटकर सामना किया और इलाज के बाद कैंसर को मात देने में भी सफलता हासिल की। जिंदगी ने हालांकि उनका पीछा नहीं छोड़ा। इलाज पूरा होने के बाद धीरे-धीरे उनकी आंखों की रोशनी कम होने लगी। इसके बावजूद उन्होंने कभी खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया।

करीब चार-पांच महीने पहले जब उन्होंने अपने सहकर्मियों से कहा था कि मैं ठीक हो गया हूं, बस आंखों में थोड़ी परेशानी है, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनके साथ होने वाली आखिरी बातचीतों में से एक होगी। बीमारी के बीच भी उनके शब्दों में उम्मीद थी, हौसला था और फिर से सामान्य जिंदगी में लौटने का भरोसा था। स्वास्थ्य लगातार साथ नहीं दे रहा था, लेकिन पत्रकारिता के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। मुश्किल परिस्थितियों में भी वे अपने काम और साथियों से जुड़े रहे। यही नितिन की पहचान थी—मुश्किलें कितनी भी बड़ी हों, हौसला छोटा नहीं होना चाहिए।

देवघर से रांची तक तय किया पत्रकारिता का सफर

नितिन चौधरी ने वर्ष 2010 में पीकेएमएस से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर, देवघर से की। वर्ष 2012 में वे रांची आए और दैनिक भास्कर से जुड़े। इसके बाद लंबे समय तक उन्होंने दैनिक भास्कर में अपनी सेवाएं दीं। पत्रकारिता में उन्होंने अपनी मेहनत और खबरों की गहरी समझ के दम पर पहचान बनाई। विशेष रूप से रेलवे और एयरपोर्ट से जुड़ी खबरों पर उनकी मजबूत पकड़ थी। रेलवे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण और राष्ट्रीय स्तर की खबरें उन्होंने रांची से ही ब्रेक कीं। खबरों के पीछे भागने वाला यह पत्रकार बीमारी के सामने भी आखिरी दम तक जूझता रहा।

सहकर्मियों के लिए सिर्फ पत्रकार नहीं, एक अपना इंसान थे

नितिन चौधरी की पहचान केवल एक पत्रकार के रूप में नहीं थी। वे अपने सहयोगियों के लिए एक मददगार साथी और जरूरतमंदों के लिए संवेदनशील इंसान थे। मिलनसार स्वभाव ऐसा था कि उनसे मिलने वाला व्यक्ति उन्हें आसानी से भूल नहीं सकता था। वे अपने साथियों की मदद करने में कभी पीछे नहीं हटते थे। किसी को जरूरत हो, किसी परेशानी में हो या किसी काम में सहयोग चाहिए हो नितिन हमेशा आगे खड़े नजर आते थे। शायद यही वजह है कि आज उनके जाने का दुख केवल पत्रकारिता जगत का दुख नहीं है, बल्कि उन तमाम लोगों का दर्द है, जिनकी जिंदगी को उन्होंने कभी न कभी अपने सहयोग और अपनापन से छुआ था।

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