द फॉलोअप डेस्क
कहते हैं कि अगर जिंदगी की राह में तूफ़ान भी आ जाएं तो हिम्मत वाले लोग उन तूफ़ानों को अपना साथी बना लेते हैं। झारखंड के हजारीबाग जिले के टाटीझरिया प्रखंड के छोटे से गांव से निकले 27 वर्षीय सजुल टुडू इस कहावत को हकीकत में बदल चुके हैं।.jpeg)
साल 2014 में बिजली की ट्रांसमिशन लाइन पर काम करते समय एक दर्दनाक हादसा हुआ। ऊँचाई से गिरे और एक ही पल में उनका बायां हाथ और बायां पैर हमेशा के लिए खो गया। किसी और के लिए यह हादसा जिंदगी का अंत होता, सपनों का टूट जाना होता, लेकिन सजुल ने इसे हार मानने का कारण नहीं बनने दिया। उन्होंने दर्द को ताक़त बनाया और जिंदगी को एक नई दिशा देने का संकल्प लिया।
आज वही सजुल टुडू हैं, जिन्होंने 160 दिनों में 7530 किलोमीटर का सफर सिर्फ एक हाथ और एक पैर के दम पर तय कर लिया। लाल-पीली रंग की साइकिल पर सवार होकर उन्होंने देश के 11 राज्यों की यात्रा की। इस सफर में बंगाल की भीड़भाड़ वाली गलियों से लेकर केरल के समुद्री किनारों तक, महाराष्ट्र की तपती सड़कों से लेकर गोवा की हरियाली तक, तमिलनाडु के कठिन रास्तों से लेकर आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की तपिश तक हर जगह उन्होंने सिर्फ पैडल नहीं घुमाए, बल्कि हौसलों की कहानी लिखी।.jpg)
सजुल कहते हैं कि "आसमान में उड़ने के लिए पंखों की नहीं, हौसलों की जरूरत होती है। जिनके पास हाथ-पैर दोनों हैं, वे भी घर पर बैठे रहते हैं। और मैं, सिर्फ एक हाथ और एक पैर से, पूरे देश का संदेश लेकर निकला हूँ कि यह जीवन एक बार मिला है। इसे सिर्फ जीना मत, कुछ ऐसा करो कि समाज तुम्हें याद रखे।”
उनकी इस यात्रा का मकसद सिर्फ खुद को साबित करना नहीं था, बल्कि लाखों दिव्यांगों को यह विश्वास दिलाना था कि दिव्यांगता शरीर की होती है, मन की नहीं।
उन्होंने यह दिखा दिया कि कठिनाई चाहे जितनी बड़ी हो, अगर इरादे बुलंद हों तो रास्ते अपने आप खुल जाते हैं। जगह-जगह लोगों ने उनका स्वागत किया, फूलों की माला पहनाई, ताली बजाई। लेकिन सजुल के लिए यह सम्मान ही सब कुछ नहीं है। उनका सपना है कि हर दिव्यांग, हर आम इंसान यह समझे कि हार मान लेना सबसे बड़ी दिव्यांगता है।.jpeg)
आज सजुल टुडू सिर्फ एक साइकिल यात्री नहीं हैं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि हिम्मत से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाता है कि जिंदगी हमें एक बार मिली है और इसे व्यर्थ जाने देना सबसे बड़ी गलती है।