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पीएम आवास योजना से 6.32 लाख परिवार वंचित रहे तो 2.9 लाख परिवारों ने गलत लाभ लिया

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द फॉलोअप, रांची

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन में झारखंड सरकार की कई खामियां सामने आई हैं। राज्य सरकार पांच साल के दौरान योजना के लिए उपलब्ध राशि में से महज 70 प्रतिशत ही खर्च कर सकी। वहीं, लाभुकों की सूची तैयार करने में हुई देरी के कारण 6.32 लाख योग्य परिवार योजना में शामिल नहीं हो सके। योजना में 2.90 लाख ऐसे लोगों को भी शामिल कर लिया गया था, जो इसके लिए पात्र नहीं थे। हालांकि बाद में ग्राम सभा ने ऐसे लोगों को सूची से हटा दिया। विधानसभा के मॉनसून सत्र में पेश भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में इन तथ्यों का उल्लेख किया गया है।

छह जिलों की 60 पंचायतों में हुई नमूना जांच

CAG ने ऑडिट के लिए राज्य के छह जिलों—बोकारो, दुमका, गिरिडीह, पलामू, रामगढ़ और सिमडेगा—का चयन किया। इन जिलों के 12 प्रखंडों की 60 ग्राम पंचायतों में योजना से संबंधित दस्तावेजों की जांच की गयी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना-2011 के आंकड़ों के अनुसार झारखंड में 19.28 लाख परिवार बेघर अथवा कच्चे या जर्जर मकानों में रह रहे थे। इनमें से 14.88 लाख परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के निर्धारित मानकों के तहत अपात्र पाये गये। ऑडिट के दौरान 2019 से 2024 के बीच योजना के तहत स्वीकृत आवासों की स्थिति का भी आकलन किया गया।

2.90 लाख अपात्र लोगों को सूची में किया गया शामिल

दस्तावेजों की समीक्षा में CAG ने पाया कि राज्य में 2.90 लाख ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना में शामिल कर लिया गया था, जिन्हें इसका लाभ नहीं मिलना चाहिए था। बाद में ग्राम सभाओं ने ऐसे लाभुकों को सूची से हटा दिया। वहीं, नमूना जांच में शामिल 60 ग्राम पंचायतों में से किसी भी पंचायत के पास स्थायी प्रतीक्षा सूची तैयार करने से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। वर्ष 2016 से नवंबर 2022 के बीच 22.34 लाख योग्य परिवारों की सूची तैयार की गयी, लेकिन इस सूची में भी कई प्रकार की गलतियां पायी गयीं।

सूची तैयार करने में दो साल की देरी, 6.32 लाख परिवार छूटे

CAG के अनुसार लाभुकों की सूची को अंतिम रूप देने में करीब दो साल की देरी हुई। इसके कारण केंद्र सरकार ने 22.34 लाख योग्य परिवारों के मुकाबले सिर्फ 16.02 लाख आवास ही आवंटित किये। इस तरह 6.32 लाख परिवार यानी करीब 28 प्रतिशत योग्य परिवार योजना के दायरे से बाहर रह गये। हालांकि, वर्ष 2016 से 2024 के दौरान केंद्र से आवंटित 16.02 लाख आवासों में से राज्य सरकार ने 15.92 लाख आवासों के निर्माण की स्वीकृति दी। इनमें से जनवरी 2025 तक 15.62 लाख आवासों का निर्माण पूरा कर लिया गया। इस लिहाज से स्वीकृत आवासों के निर्माण में उपलब्धि करीब 98 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन आवासों को एक साल में पूरा किया जाना था, उन्हें पूरा करने में अधिकतम तीन साल तक का समय लगा।

20,199 करोड़ रुपये उपलब्ध, खर्च हुए सिर्फ 14,113 करोड़

CAG ने योजना के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाये हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए कुल 20,199.98 करोड़ रुपये उपलब्ध थे। इसमें से राज्य सरकार केवल 14,113.07 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी। यानी उपलब्ध राशि का करीब 70 प्रतिशत ही इस्तेमाल हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2019-24 के दौरान केंद्र का हिस्सा स्टेट नोडल अकाउंट (SNA) में ट्रांसफर करने में राज्य सरकार की ओर से देरी हुई। निर्धारित समय सीमा के मुकाबले अधिकतम 92 दिनों तक की देरी हुई। इसके चलते राज्य सरकार पर ब्याज के रूप में 22.39 करोड़ रुपये की देनदारी बन गयी। CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, योजना के क्रियान्वयन में एक तरफ आवास निर्माण की उपलब्धि करीब 98 प्रतिशत रही, वहीं दूसरी ओर लाभुकों के चयन, प्रतीक्षा सूची तैयार करने, वित्तीय प्रबंधन और केंद्र की राशि को SNA में ट्रांसफर करने में गंभीर कमियां सामने आयीं।


 

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