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दिनेश गोप की तस्वीर के क्या हैं संकेत, क्या चुनावी राजनीति में किस्मत आजमाएगा रॉबिन हुड!

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द फॉलोअप डेस्क
बड़ी-बड़ी मूछें, बढ़ी हुई दाढ़ी, चेहरे पर तेज, लंबे घने बाल... चारों तरफ पुलिस की भारी सुरक्षा और कैमरे में कैद करने की मीडिया की होड़... बीते 20 वर्षों से कानून की नजरों में फरार दुर्दांत अपराधी दिनेश गोप जब पहली बार पुलिस के शिकंजे में बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से बाहर निकला तो लोग देखते रह गए। बीते 21 मई को गिरफ्तार हो अब एनआईए की रिमांड में पहुंचा दिनेश गोप की चर्चा एयरपोर्ट पर निकलते वक्त फोटोग्राफरों द्वारा ली गयी उसकी एक तस्वीर को लेकर जारी है। हाथ उठाकर नेताओं की तरह कैमरे का अभिवादन करते दिनेश गोप की यह वही तस्वीर है, जिससे अब उसके भविष्य की बातें होने लगी है। जिस अंदाज में दिनेश गोप ने पुलिसकर्मियों की भारी मौजूदगी में पत्रकारों के कैमरा के सामने खुद को पेश किया है, चर्चा हो रही है कि वह आने वाले चुनावों में अपनी भूमिका सामने से निभाएगा। वैसे यह कोई आश्चर्य नहीं होगा जब कोई दुर्दांत अपराधी चुनाव में किस्मत आजमाए।

कई पूर्व नक्सली लड़ चुके हैं चुनाव
झारखंड की बात करें तो कई पूर्व नक्सली यहां चुनाव लड़ चुके हैं। कई लोग तो विधायक और सांसद तक का सफर तय कर चुके हैं। हाल के दिनों को याद करें तो पिछले ही विधानसभा चुनाव में पूर्व नक्सली कुंदन पाहन भी अपनी किस्मत आजमा चुका है। हालांकि, उसे हार का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर पूर्व नक्सली राजद नेता कामेश्वर बैठा तो सांसद तक बने। पूर्व नक्सली मसीह चरण पूर्ति झामुमो के टिकट पर 2009 में विधायकी का चुनाव लड़े और महज 600 वोट से चुके हैं। दरअसल कामेश्वर बैठा, मसीह चरण पूर्ति और कुंदन पाहन जैसों को याद करने के पीछे की वजह यह है कि दिनेश गोप को लेकर हो रही चर्चा बेवजह नहीं है। ऐसा पहले भी होते आया है।

रॉबिन हुड की छवि है दिनेश गोप की
चुनाव लड़ने के पीछे चर्चा की एक और बड़ी वजह ये भी है की दुर्दांत आपराधिक इतिहास के साथ दिनेश गोप की एक छवि रॉबिन हुड की भी रही है। खूंटी, सिमडेगा, लोहरदगा और गुमला जिले के कुछ इलाकों में दिनेश गोप की छवि एक मददगार के तौर पर भी रही है। कई पत्रकार यह बताते हैं कि अपने प्रभाव इलाके में दिनेश ने कई अच्छे विद्यालय खोल रखे हैं। यहां अनाथ और गरीब घर के बच्चों को निःशुल्क पढ़ाई के साथ रहने और खाने-पीने तक की सुविधा दी जाती है। इसके अलावा गरीब घर की बेटियों की शादी हो या अन्य सामाजिक काम दिनेश गोप और उसका संगठन पीएलएफआई मदद करता रहा है। जानकर बताते हैं कि दिनेश गोप की जो छवि कानून के नजरों में है, उसके चाहने वालों की नजरों में ठीक उसके उलट है। हालांकि, हकीकत यह भी है कि जिन इलाकों में दिनेश गोप का प्रभाव है, उन इलाकों की सभी सीटें सुरक्षित है। बावजूद इसके सच यह भी है कि दिनेश गोप के प्रभाव वाले इलाके में कौन जीतेगा यह तय भी पीछे की दरवाजे से यही करते आया है। ऐसे में इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है कि दिनेश गोप आने वाले दिनों में जगंल छोड़कर मुख्यधारा में किंगमेकर की भूमिका में हुकूमत करता दिखाई दे।

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