द फॉलोअप डेस्क
झारखंड हाईकोर्ट के नए भवन के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वीरों की धरती में आप सभी का स्वागत है। झारखंड उच्च न्यायालय के नए भवन का आज उद्घाटन राष्ट्रपति के हाथों से हो रहा है। हमारे साथ-साथ यह झारखंड के करोड़ों जनता के लिए गौरव का विषय है। हमने देखा कि लगभग 165 एकड़ में यह परिसर फैला हुआ है। लगभग 600 करोड़ की लागत से इसे तैयार किया गया है। एक आदिवासी बहुल छोटे राज्य में यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। आशा है कि झारखंड के आदिवासी, पिछड़े, दलित लोगों के लिए न्याय की दिशा में यह मील का पत्थर साबित होगा।

विचाराधीन कैदियों के मामले में गंभीर मंथन की है आवश्यकता
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि 26 नवंबर 2022 को संविधान दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति ने देश के जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों पर अपनी चिंता व्यक्त की थी। इस पर एक गंभीर मंथन की आवश्यकता है। गत वर्ष ऐसे मामलों की सूची तैयार की जो अब समाधान के लिए 5 वर्षों से अधिक समय से 3601 मामले लंबित है। अभियान चलाकर लगभग 3400 मामलों का निष्पादन कराया गया। अब हमने 4 वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों की सूची तैयार की है। जिसका जल्द निष्पादन किया जाएगा। मैं खुद मॉनिटरिंग कर रहा हूं।

चीफ जस्टिस ने कहा फिर रांची आने का मिलेगा मौका
कार्यक्रम के दौरान चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि जब भारतीय नागरिक अपने मामलों को लेकर न्यायपालिका के द्वार में प्रवेश करते हैं, तब उनकी आस्था को कायम रखना हम सब का उत्तरदायित्व है। सजा होने के पहले हजारों नागरिक जेल में बंद रहते हैं। महीनों तक, कभी सालों तक, उनके पास साधन नहीं है, साक्षरता नहीं है। ऐसे में यदि न्याय प्रणाली में उनको न्याय शुद्धता से मिल नहीं पाई तो उनकी आस्था कैसे बनी रहेगी। न्याय व्यवस्था का मूलभूत सिद्धांत है कि हम लोगों के अंदर पहले आस्था कायम कर सकें। उन्होंने कहा कि जिला न्यायालयों को सक्षम बनाना, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय का कर्तव्य है। जब हम न्यायालयों को यह जिम्मेदारी देते हैं तो हम उन्हें अधीनस्थ की जिम्मेदारी देते हैं। जब जिम्मेदारी मिलेगी, समानता मिलेगी तभी उनके कार्यों में जिम्मेदारी बढ़ेगी। आज के समारोह का विशेष महत्व इस बात पर है न्याय प्रणाली और सामाजिक न्याय में सद्भाव बनाए रखना। आज का कार्यक्रंम राज्य और राष्ट्र के हित में है।

कचहरी में महिलाओं के लिए नहीं है शौचालय
चीफ जस्टिस ने कहा कि न्याय प्रणाली का लक्ष्य सामान्य नागरिक को न्याय दिलाना है। समय पर सुनवाई हो। फैसले हो। कचहरी में महिलाओं के लिए अलग शौचालय हो। पर आज देश में कई कचहरियां ऐसी हैं जिनमें महिलाओं के लिए शौचालय भी नहीं। ऐसी परिस्थिति में सुधार लाने की आवश्यकता है। हमें अपने आप से कठोर सवाल पूछने पड़ेंगे। नागरिकों तक पहुंचना होगा। उन्होंने कहा कि हम टेक्नोलॉजी के माध्यम से अपने कार्य को नजदीकी प्रदान कर पा रहे हैं। इस शुभ अवसर पर मैं आप सबको बधाई देता हूं। मुझे यहां आमंत्रित करने के लिए आपका चरण स्पर्श कर धन्यवाद देता। मुझे आशा है कि आप मुझे रांची फिर लौट आने का अवसर देंगे।

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