गिरिडीह
गिरिडीह में उसरी नदी का पानी निजी फैक्ट्री तक पहुंचाने की योजना के खिलाफ रविवार को जनाक्रोश फूट पड़ा। हजारों ग्रामीणों ने कई किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। आंदोलन की कमान डुमरी विधायक जयराम महतो ने संभाली और दो टूक चेतावनी दी कि यदि उसरी नदी का पानी पाइपलाइन के जरिए बालमुकुंद फैक्ट्री तक पहुंचाने की कोशिश की गई तो पूरे इलाके में बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन में बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और दिव्यांगों की भारी भागीदारी ने साफ कर दिया कि यह विरोध किसी एक गांव का नहीं, बल्कि उसरी नदी और हजारों लोगों के भविष्य को बचाने की लड़ाई बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी उनके लिए सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि खेती, पेयजल, पशुपालन और जीवन का आधार है। ऐसे में निजी उद्योग को नदी का पानी देने की किसी भी कोशिश का हर स्तर पर पुरजोर विरोध किया जाएगा।
उसरी नदी को बताया पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा
आंदोलनकारियों का कहना है कि उसरी नदी से पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। नदी का पानी आसपास के गांवों की पेयजल जरूरतों, खेती और पशुपालन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनका आरोप है कि यदि निजी फैक्ट्री को पाइपलाइन के जरिए नदी का पानी उपलब्ध कराया गया तो भविष्य में नदी के जलस्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ेगा और ग्रामीणों को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। सभा को संबोधित करते हुए जयराम मेहतो ने कहा, "हम जल, जंगल और जमीन की बात करते हैं। उसरी नदी का पानी किसी निजी फैक्ट्री को देना पूरी तरह गलत है। अगर नदी का पानी फैक्ट्री तक पहुंचाया गया तो गांवों में पानी की कमी हो जाएगी। यह सिर्फ नदी नहीं, बल्कि हजारों लोगों की जिंदगी और आजीविका का सवाल है। हम किसी भी कीमत पर इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
प्राकृतिक संसाधनों के दोहन' के खिलाफ ग्रामीणों का ऐलान
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कहा कि विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का दोहन स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि नदी केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका और जीवन से जुड़ी हुई है। इसलिए इसे बचाना सभी की जिम्मेदारी है। मानव श्रृंखला में शामिल लोगों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार से प्रस्ताव रद्द करने की मांग की। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में चरणबद्ध तरीके से बड़ा जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। ग्रामीणों का कहना है कि उसरी नदी को बचाने की यह लड़ाई किसी एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की लड़ाई है।