logo

रांची : गठबंधन ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार, कहा- केंद्रीय एजेंसियों के सहारे सरकार को BJP कर रही अपदस्थ करने की कोशिश, लगाएं रोक 

murmu1.jpg

द फॉलोअप डेस्क:
झारखंड में पिछले कई महीनों से केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। खनन मामले में चल रही जांच को लेकर ईडी ने सीएम हेमंत सोरेन को समन कर पूछताछ के लिए बुलाया था। जिसे लेकर UPA के घटक दलों में काफी आक्रोश है। गठबंधन के सदस्यों ने केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को रोकने की गुहार राष्ट्रपति दौपद्री मुर्मू से लगाई। कहा, BJP केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर गलत तरीके से सरकार को अपदस्थ करने की कोशिश कर रहा। उनकी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

मौजूदा सरकार ने नहीं मानी हार
गठबंधन ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में कहा है कि वर्तमान सरकार अपार जनसमर्थन के साथ सत्तारुढ़ हुई है। जनता भाजपा सरकार की नाकामियों, भ्रष्टाचार एवं कुशासन से उब चुकी थी। झारखंड की जनता को इस नई सरकार से बहुत उम्मीद है। हमारी सरकार ने जब विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं माना। कोरोना जैसे भयावह दौर से उबरते हुए तेजी से जन-भावनाओं के अनुरूप कार्य करना प्रारंभ किया। तब भाजपा एक जिम्मेवार विपक्ष की भूमिका निभाने के बदले चुनी हुई सरकार को अपदस्थ करने का प्रयास करने लगी। 

विधायकों को तोड़ने का प्रयास 
भाजपा ने गठबंधन के विधायकों को तोड़ने का प्रयास किया। इसके साथ केंद्रीयों एजेंसियों के दुरुपयोग का सिलसिला लगातार जारी है। जैसे-जैसे सरकार अपने वादों के अनुरूप जनहित का कार्य तेजी से करते जा रही है। विपक्ष की हताशा बढ़ती जा रही है। गठबंधन की सरकार को अस्थिर करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों यथा चुनाव आयोग ईडी एवं आयकर विभाग आदि की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

केंद्रीय एजेंसी का उद्देश्य सरकार को गिराना
गठबंधन ने राष्ट्रपति से कहा कि केंद्रीय एजेंसियों के पिछले 6 माह की भूमिका पर नजर दौड़ाई जाए तो स्वतः स्पष्ट हो जाएगा कि उनका एकमात्र उद्देश्य चुनी हुई सरकार को गिराना है। हमारे लोकप्रिय नेता को प्रताड़ित करना है। यहां गौर करने वाली बात है कि उनके हर गोपनीय कदम की जानकारी भाजपा नेताओं की ट्विट से मिलती है। इतना ही नहीं राज्य निर्माता दिशोम गुरु (शिबू सोरेन) को भी भाजपा नेताओं ने बदनाम करने की कोई कसर नहीं छोड़ा है। इनके खिलाफ लोकपाल में शिकायत दर्ज कराई गई। इससे स्वतः स्पष्ट है कि केंद्रीय एजेंसियां केंद्र सरकार के इशारे पर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करना चाहती है।

लोकतंत्र के चीरहरण को मौन होकर नहीं देख सकती
पत्र में राष्ट्रपति से कहा गया है कि संविधान के संरक्षक होने के नाते आप लोकतंत्र के चीरहरण को मौन होकर नहीं देख सकती। संघीय ढांचे को तार-तार होने से आपको बचाना ही होगा। खासकर दलित,आदिवासी, पिछड़े व अल्पसंख्यकों के प्रति आपकी बड़ी जवाबदेही है। जिसके उत्तरोतर कल्याण के निमित गठबंधन सरकार दिन-रात काम कर रही है। हम केंद्रीय एजेंसियों को रोक नहीं सकते। मगर आपसे गुहार जरूर लगा सकते हैं। इसलिए निवेदन है कि झारखंड की जनता द्वारा चुनी हुई लोकप्रिय सरकार को गलत तरीके से अपदस्थ करने की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।