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स्वर्णरेखा और खरकई नदी उफनाई, जमशेदपुर के इन इलाकों में बाढ़ का अलर्ट

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जमशेदपुर:

जमशेदपुर में मूसलाधार बारिश की वजह से स्वर्णरेखा और खरकई नदी उफान पर है। दोनों नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। स्वर्णरेखा का जलस्तर 120.64 मीटर पर पहुंच गया है, जो  खतरे के निशान  से महज 86 सेंटीमीटर नीचे है। खरकई का जलस्तर 130.95 मीटर पर पहुंच गया है और ये नदी खतरे के निशाने से 1.95 मीटर ऊपर बह रही है। एक ओर नदियों का जलस्तर बढ़ने और दूसरी ओर आसपास के डैम से पानी छोड़ने की वजह से बागबेड़ा, जुगसलाई, कदमा और मानगो के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। जिला प्रशासन ने निचले और तटीय इलाकों में अलर्ट  जारी किया है। प्रशासन की ओर से माइकिंग कर लोगों को नदी घाट, डूब क्षेत्र और जलजमाव वाली जगहों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। खासतौर पर बच्चों का ध्यान रखने को कहा गया है। 

चांडिल डैम के 17 फाटक खोलकर छोड़ा पानी
लगातार बारिश का असर चांडिल डैम के जलस्तर पर भी पड़ा है। जलस्तर बढ़ने के बाद चांडिल डैम के 13 रेडियल गेट समेत कुल 17 फाटक खोल दिये गये हैं। सोमवार सुबह 8 बजे डैम से कुल 744.57 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा था। डैम का जलस्तर 179.19 मीटर दर्ज किया गया। चांडिल से पानी छोड़े जाने के साथ ही ओडिशा के ब्यंगबिल डैम का फाटक भी खोला गया है। ऐसे में ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से पानी की आवक और लगातार बारिश के बीच खरकई व स्वर्णरेखा के जलस्तर पर दबाव बढ़ा है। यही वजह है कि शहर में बाढ़ का खतरा एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है।

कुछ घंटों में बदली नदी की तस्वीर
इससे पहले 31 अगस्त की सुबह 8 बजे खरकई का जलस्तर 129.03 मीटर था और वह खतरे के निशान से महज 3 सेंटीमीटर ऊपर थी। तब नदी का जलस्तर गिर रहा था। लेकिन इसके बाद आसपास के जिलों में हुई बारिश और पानी की आवक ने तस्वीर बदल दी। अब खरकई 130.95 मीटर तक पहुंच चुकी है। यानी कुछ ही घंटों में जलस्तर में करीब 1.92 मीटर की बढ़ोतरी हुई है। स्वर्णरेखा नदी का भी जलस्तर सुबह के मुकाबले बढ़ा है। सुबह इसका जलस्तर 119.70 मीटर था, जो अब बढ़कर 120.64 मीटर हो गया है। यानी इसमें भी करीब 94 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है।

तटीय इलाकों में फिर बढ़ी चिंता
नदियों के बढ़ते जलस्तर, खासकर खरकई के डेंजर लेवल से काफी ऊपर जाने के कारण नदी किनारे बसे इलाकों पर प्रशासन की ओर से निगरानी बढ़ा दी गयी है। जिला प्रशासन तटीय क्षेत्र और डूब इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और लोगों से अपील की गयी है कि नदी घाट, डूब क्षेत्र और जलजमाव वाले इलाकों में जाने से बचें। तटीय इलाकों में रहने वाले लोग जरूरत पड़ने पर सुरक्षित एवं ऊंचे स्थानों या नगर निकाय की ओर से चिह्नित आश्रय स्थलों में चले जाये। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

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