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पोटका में ब्रेन मलेरिया से तीन स्कूली बच्चों की मौत, MGM अस्पताल में 20 मरीज भर्ती

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पूर्वी सिंहभूम 
पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया से तीन स्कूली बच्चों की मौत के बाद राज्य स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। शनिवार को राज्य मलेरिया विभाग की टीम प्रभावित गांवों में पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। जांच के दौरान छह नये मामलों की पुष्टि हुई, जिसके बाद संक्रमितों की संख्या बढ़कर 15 हो गयी है। सभी मरीजों का इलाज एमजीएम अस्पताल, पोटका सीएचसी, सदर अस्पताल तथा निजी अस्पतालों में चल रहा है।
एमजीएम अस्पताल में 20 मरीज भर्ती
फिलहाल जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में ब्रेन मलेरिया से पीड़ित 20 मरीज भर्ती हैं। भर्ती मरीजों में 15 का इलाज शिशु वार्ड और शेष पांच का मेडिसिन विभाग में चल रहा है। इनमें पांच बच्चों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। इसमें एक ही परिवार के दो लोग मलेरिया से पीड़ित हैं, जिनमें आठ वर्षीय सबोला सरदार की मौत हो गयी है। वहीं, उसकी बहन खुशबू सरदार (एक वर्ष) की स्थिति गंभीर बनी हुई है। उसे ब्रेन मलेरिया, गंभीर एनीमिया, दौरे और सांस लेने में तकलीफ के कारण वेंटिलेटर पर रखा गया है। वहीं, पोटका सेरेलाडीह निवासी मंगल भूमिज और उसका एक वर्षीय बेटा अभिजात भूमिज मलेरिया से पीड़ित है। पोटका से बेहतर इलाज के लिए दोनों को एमजीएम अस्पताल लाया गया है।
मलेरिया विभाग की टीम ने जाना स्थिति का हाल
राज्य स्तरीय वेक्टर बोर्न डिजीज कंसल्टेंट विनय कुमार, राज्य मलेरिया विभाग के जयंत कुमार, अनिल कुमार तथा जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. मृत्यंजय धाउड़िया ने केजीबीवी विद्यालय, सानग्राम, कांदर समेत प्रभावित इलाकों का दौरा किया। टीम ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और ग्रामीणों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, जलजमाव रोकने तथा बुखार होने पर तुरंत जांच कराने की सलाह दी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गंभीर मरीजों को एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया है, जबकि अन्य का इलाज स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में किया जा रहा है। विभाग ने बताया कि स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और सभी मरीजों को समुचित इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। इधर, पूर्वी सिंहभूम जिले में ब्रेन मलेरिया गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप लेता जा रहा है। एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बच्चों के लिए बनाए गए पीआईसीयू और एनआईसीयू के सभी बेड पूरी तरह भर चुके हैं। कई बच्चों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पोटका प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित
सबसे अधिक प्रभावित पोटका प्रखंड में कई परिवारों के एक से अधिक सदस्य संक्रमित हैं। सेरेनडीह गांव में एक वर्षीय बच्चे की स्थिति नाजुक बनी हुई है, जबकि परिवार के अन्य सदस्य भी बुखार से पीड़ित हैं। एमजीएम अस्पताल के शिशु रोग विभाग में पोटका, डुमरिया, गुड़ाबांधा, पटमदा, चांडिल, और चक्रधरपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए बच्चों का इलाज चल रहा है। शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में दिमागी बुखार जैसे लक्षणों वाले बच्चों की संख्या अचानक बढ़ी है। एमजीएम अस्पताल में शिशु रोग वार्ड पूरी तरह भरा हुआ है। वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम गंभीर मरीजों की लगातार निगरानी कर रही है।
शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
जिला मलेरिया पदाधिकारी ने बताया कि डुमरिया और मुसाबनी क्षेत्र में भी लगातार मामले सामने आ रहे हैं। प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें कैंप कर रही हैं तथा एंटी लार्वा छिड़काव और सर्वे अभियान चलाया जा रहा है। पोटका में घर-घर जांच की जा रही है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि शुरुआती लक्षणों को सामान्य बुखार समझकर नजरअंदाज करने से संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच सकता है, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। उन्होंने कहा कि समय पर इलाज मिलने पर अधिकांश मरीज ठीक हो जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बच्चों को तेज बुखार होने पर झाड़-फूंक के बजाय तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या एमजीएम अस्पताल ले जायें। विभाग ने आश्वस्त किया है कि अस्पताल में दवाओं और उपकरणों की कोई कमी नहीं है और हर मरीज को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।

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