द फॉलोअप, रांची
महाराष्ट्र में मराठी भाषा नहीं बोलने वाले ऑटो और टैक्सी चालकों के सामने बेरोजगारी का खतरा उत्पन्न हो गया है। महाराष्ट्र सरकार के एक आदेश से झारखंड और बिहार के हजारों ऑटो-टैक्सी चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर कैंसिल होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने घोषणा की है कि जिन व्यावसायिक वाहन चालकों को मराठी की बुनियादी जानकारी नहीं है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पिछले महीने महाराष्ट्र सरकार के परिवहन विभाग ने एक आदेश जारी किया था। उसमें कहा गया कि 15 अगस्त तक गैर मराठियों को मराठी भाषा सीख लेनी होगी। अब वहां मराठी भाषा नहीं सीख पाने वाले टैक्सी और ऑटो चालकों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ कर दी गयी है। पकड़े जाने पर अब उन्हें एक महीने का अतिरिक्त समय दिया जा रहा है। इस अवधि में अगर गैर मराठी भाषी मराठी भाषा नहीं सीख पाते हैं तो उनका पहले ड्राइविंग लाइसेंस और बैज को तीन महीने के लिए निलंबित किया जाएगा। यदि 3 महीने के अंदर भी वे मराठी भाषा नहीं सीख पाते हैं तो उनका परमिट और लाइसेंस को पूरी तरह से रद कर दिया जाएगा।

महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने कहा है कि विशेष अभियान अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ के नेतृत्व में पूरे महाराष्ट्र में चलाया जाएगा। इस दौरान क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के उड़न दस्तों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सख्त चेकिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही अभियान में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी जांच प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाएगी। सरकार के इस कदम से दूसरे राज्यों से आकर महाराष्ट्र में गाड़ी चलाने वाले हजारों चालकों के सामने आजीविका की चिंता बढ़ गयी है। में अपनी आजीविका को लेकर चिंता बढ़ गई है। 'सेवा सारथी ऑटो रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन' के नेता डीएम गोसावी का कहना है कि सरकार ने मराठी के 'वर्किंग नॉलेज' को अनिवार्य तो कर दिया है। लेकिन इसकी कोई स्पष्ट परिभाषा तय नहीं की गई है। इतना ही नहीं यूनियनों का मानना है कि इस अस्पष्टता के कारण आरटीओ अधिकारियों द्वारा चालकों का वित्तीय शोषण और भ्रष्टाचार बढ़ सकता है। हालांकि महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी की आजीविका छीनना नहीं, बल्कि लोगों को स्थानीय भाषा से जोड़ना है। परिवहन मंत्री ने बताया कि कुछ महीने पहले शुरू की गई मराठी भाषा सीखने की इस पहल में अब तक महाराष्ट्र भर से डेढ लाख से अधिक चालक आगे आ चुके हैं।
