लोकसभा में केंद्र सरकार से की मांग
द फॉलोअप डेस्क
गोड्डा सांसद निशिकांत दूबे ने आज लोकसभा में डिलिमिटेशन और धर्म परिवर्तन करने पर एसटी का दर्जा समाप्त करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में तीन आर्टिकल हैं। 339, 341 और 342. उन्होंने कहा कि वह आज आर्टिकल 339 की बात इसलिए कह रहे हैं क्योंकि झारखंड में 2001 की जनगणना के बाद भी 2008 में डिलिमिटेशन नहीं हुआ। पूरे देश में डिलिमिटेशन हो गया झारखंड में डिलिमिटेशन नहीं हुआ। उसका कारण ये था कि 2001 की जनगणना के आधार पर जब 2008 में डिलिमिटेशन हो रहा था तो अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित लोकसभा की एक और विधानसभा की तीन सीटें कम हो रही थी। उनका मानना है कि अब जब 2011 की जनगणना के आधार पर डिलिमिटेशन होगा तो झारखंड में एसटी के लिए सुरक्षित लोकसभा की दो और विधानसभा की छह सीटें किसी कीमत पर घटेंगी।
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निशिकांत दूबे ने आगे कहा कि आर्टिकल 339 कहता है कि शिड्युल एरिया का अधिकार केंद्र सरकार के पास होगा। लेकिन कांग्रेस की सरकार ने 1956 में इसमें संशोधन कर दिया।अभी सुप्रीम कोर्ट का आर्टिकल 341 पर एक आदेश आया है। यदि अनुसूचित जाति का व्यक्ति बौद्ध, सिख और जैन को छोड़ मुसलमान या ईसाई बनते हैं तो उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। लेकिन आर्टिकल 342 में यह शिड्युल ट्राइब्स पर यह लागू नहीं होता है। क्योंकि हमारे देश में अधिकतर शिड्युल ट्राइब्स ने मुसलमानों से शादी कर ली। इस कारण उनकी जनसंख्या घट गयी। अगर शिड्युल ट्राइब्स के ऐसे लोग ये कहते हैं कि उनके बच्चे नाना-नानी के यहां रहते हैं तो उन पर यह लागू नहीं होता। इसलिए आर्टिकल 330 को लागू करते हुए अगर शिड्युल ट्राइब्स का व्यक्ति सिख, बौद्ध या जैन छोड़ ईसाई और मुसलिम बनता है तो उन्हें आरक्षण के लाभ से वंचित कीजिए। साथ ही झारखंड में डिलिमिटेशन समाप्त कीजिए।
