जीतेंद्र कुमार
टेंडर में टैंपरिंग (छेड़छाड़) होता है यह आम धारणा है। ई-निविदा में भी छेड़छाड़ नहीं रुकने के आरोप लगाए ही जाते रहे हैं। मनचाही कंपनियों को टेंडर पहुंचाने के लिए शीर्ष स्तर पर होनेवाले खेल का मामला हाईकोर्ट भी पहुंचता रहता है। राज्य के पथ निर्माण विभाग के इस खेल का एक ताजा उदाहरण सामने आया है। किस तरह पहले किसी कंपनी को टेक्निकल बीड में असफल घोषित कर दिया गया और बाद में उस कंपनी का फायनांशियल बीड खोल दिया गया। लगभग 16 करोड़ रुपए अधिक में टेंडर आवंटित भी कर दिया गया। पूरा मामला पिचरी (जैना मोड़ फुसरो) से तेनुघाट(पेटरवार) रोड के कुल 26.34 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण से संबंधित है। इस टेंडर का आईडी-2024_CECOM_86864_1 है। इस टेंडर के लिए 90.86 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति थी, जबकि बीड डोक्युमेंट के अनुसार सड़क निर्माण की लागत 82.19 करोड़ दर्शायी गयी है।

समझिए टेंडर में टैंपरिंग का खेल
15 जुलाई 2024 को इस टेंडर को खोला गया। इसके लिए चार कंपनियों ने टेंडर डाला। मेसर्स सतीश प्रसाद, एम एंड एम पेविंग प्राइवेट लिमिटेड, क्लासिक इंजीकॉम प्राइवेट लिमिटेड और केके बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड। इस टेंडर को 25 जुलाई 2024 तक निष्पादित कर दिया जाना था। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। सेटिंग का खेल जारी हो गया। सेटिंग होने तक टेंडर फाइनल करने की प्रक्रिया रोक दी गयी। संभवतः सब कुछ सेट हो जाने के बाद 4 फरवरी 2025 को टेंडर खोला गया। अभियंता प्रमुख ने 5 फरवरी 2025 को ई-प्रोक्योरमेंट सेल के अध्यक्ष को पत्र लिखा। उसमें कहा गया कि टेंडर की वैद्यता बढ़ाने के लिए मेसर्स सतीश प्रसाद और क्लासिक इंजीकॉम ने अपनी सहमति नहीं दी। क्योंकि टेंडर की मूल वैद्यता 25 जुलाई 2024 को ही समाप्त हो गयी थी। इसलिए छह महीने से अधिक का समय बीत जाने के कारण टेंडर में सहभागिता की स्वीकृति जरूरी होता है। अभियंता प्रमुख ने पत्र में लिखा कि दोनों कंपनियों की सहमति नहीं मिलने के कारण एम एंड एम पेविंग पेविंग प्राइवेट लिमिटेड और केके बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड का टेक्निकल बीड सही पाया गया। इसलिए 5 फरवरी की शाम पांच बजे दोनों कंपनियों का फायनांशियल बीड खोला जाए।

अब देखिए क्या से क्या हो गयानह
पथ निर्माण विभाग के ई-प्रोक्योरमेंट साइट पर दर्शाया गया है कि पहली बार फायनांशियल बीड खुला तो क्लासिक इंजीकॉम का दर-74.74 करोड़ रुपए एवं एम एंड एम पेविंग प्राइवेट लिमिटेड का 90.11 करोड़ रुपए कोट किया गया पाया गया। इस आधार पर विभाग ने क्लासिक इंजीकॉम को एल-1 एवं एम एंड एम पेविंग को एल-टू घोषित कर दिया। लेकिन ई-प्रोक्योरमेंट सेल के साइट पर फिर दूसरी बार भी फायनांशियल बीड खोलने की प्रक्रिया दर्शायी गयी। इस बार 90.11 करोड़ की राशि कोट करने वाली कंपनी एम एंड एम पेविंग को एल-1 एवं 90.25 करोड़ की राशि कोट करनेवाली कंपनी केके बिल्डर को एल-2 घोषित कर दी गयी। इस तरह पहली बार मात्र 74.74 करोड़ में काम करनेवाली कंपनी क्लासिक इंजीकॉम के बदले एम एंड एम पेविंग प्राइवेट लिमिटेड को टेंडर आवंटित कर दिया गया जो लगभग 16 करोड़ अधिक पर 90.11 करोड़ रुपए में काम करने की राशि कोट किया था। अब यह सब कैसे हो गया, शायद टेंडर में टैंपरिंग का इससे बेहतर प्रमाण दूसरा नहीं हो सकता है।