द फॉलोअप, रांची
झारखंड के विभिन्न अस्पतालों में बनने से पहले ही मॉड्युलर OT का टेंडर लहु लुहान है। मेदिनी राय मेडिकल कॉलेज और सदर अस्पताल पलामू में बनने वाले तीन ओटी का टेंडर, इसका प्रमाणिक उदाहरण है। भवन निर्माण विभाग द्वारा बनाए गए नियमों को ताक पर रख कर टेंडर की प्रक्रिया पूरी किए जाने के दस्तावेजी प्रमाण, विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पहले तो नियम विरुद्ध 2.01 करोड़ का टेंडर ऑफ लाइन निकाला गया, दूसरा टेंडर की अवधि समाप्त होने के बाद भी इसे मनचाहे बीडर को आवंटित करने के उद्देश्य से निष्पादित किया जा रहा है। दिलचस्प यह भी है कि राज्य के अन्य जिलों में निकले मॉड्युलर ओटी के टेंडर से डालटेनगंज के टेंडर की अलग शर्तें, पूरे टेंडर प्रक्रिया को विवादित बना दिया है।

टेंडर के खेल की कहानी डालटेनगंज के मॉड्युलर ओटी की
राज्य सरकार के निर्णय के तहत झारखंड के विभिन्न जिलों के अस्पतालों में मॉड्युलर OT का निर्माण कराया जाना है। उसी फैसले के तहत हजारीबाग में तीन, कोडरमा में दो मॉड्युलर ओटी का टेंडर निकाला गया है। इन दोनों जिलों में ई-टेंडर किया गया। देवघर में भी ओटी का ई-टेंडर हुआ। अब डालटेनगंज पर गौर करें। यहां पहली बार 22 अप्रैल 2025 को तीन अलग अलग ओटी के लिए अलग अलग ई-टेंडर आमंत्रित किया गया। लेकिन अप्रत्याशित रूप से कुछ दिनों बाद ई-टेंडर को रद्द कर दिया गया। फिर तीनों ओटी के टेंडर को क्लब करते हुए 2.01 करोड़ का ऑफ लाइन टेंडर आमंत्रित किया गया। इसे जमा करने की अंतिम तिथि 26 नवंबर 2025 निर्धारित की गयी। फिर 27 नवंबर 2025 को टेंडर खोलने की तिथि निर्धारित की गयी। बाद में इस टेंडर के एक बीडर एसके इंटरप्राइजेज के अनुभव और अन्य प्रमाण पत्रों को लेकर कार्यपालक अभियंता महेंद्र राम ने कई तरह की आपत्ति दर्ज की। एसके इंटरप्राइजेज ने भी इस संबंध में भवन निर्माण विभाग के अवर सचिव को आवश्यक सबूतों के साथ आपत्तियां दर्ज करायी। अवर सचिव के पत्र के बाद मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और कार्यपालक अभियंता के स्तर पर विरोधाभाषी जांच भी हुए। इस तरह ओटी का टेंडर उलझ गया। इस तरह 10 माह बाद इस टेंडर की वित्तीय बोली खोलने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है। जबकि टेंडर की अधिकतम 180 दिनों की वैलिडीटी समाप्त हो चुकी है।
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ऑफ लाइन टेंडर क्यों
डालटेनगंज में बनने वाले मॉड्युलर ओटी को लेकर सबसे बड़ा सवाल है कि इसका टेंडर ऑफ लाइन क्यों। भवन निर्माण विभाग के तत्कालीन सचिव सुनील कुमार के हस्ताक्षर से 19 नवंबर 2020 को विभाग ने एक आदेश (2163 भ) जारी किया है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 50 लाख रुपए से ऊपर की सभी निविदाएं ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली अंर्तगत निष्पादित किए जाने का आदेश दिया जाता है। अब सवाल है कि विभाग के आदेश का यहां अनुपालन क्यों नहीं किया जा रहा, जबकि यह टेंडर 2.01 करोड़ रुपए का है।
टेंडर की वैलिडीटी समाप्त होने के बाद भी क्यों किया जा रहा निष्पादित
राज्य सरकार के स्टैंडर्ड बीड डोक्युमेंट (एसबीडी) के अनुसार टेंडर सबमिशन की अंतिम तिथि के बाद वह टेंडर कम से कम 120 और अधिकतम 180 दिनों तक वैलिड रहेगा। अब सवाल है कि डालटेनगंज के मॉड्युलर ओटी के सबमिशन की अंतिम तिथि 26 नवंबर 2025 थी। फिर नौ माह बाद ( लगभग 285 दिन) इस टेंडर के फायनांशियल बीड को खोलने की प्रक्रिया क्यों शुरू की जा रही है। इसमें विभाग का क्यां इंटरेस्ट है। कार्यपालक अभियंता, अधीक्षण अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक नियमों की अनदेखी क्यों करते जा रहे हैं।
कुछ अजब गजब के उदाहरण
यह कोई संयोग है या सेटिंग। हजारीबाग और कोडरमा में बनने वाले मॉड्युलर ओटी के टेंडर में SNG और Sugu नामक कंपनियां एल-1 आयी। डालटेनगंज के टेंडर में भी इन दोनों कंपनियों के अलावा एसके इंटरप्राइजेज तीसरी कंपनी है। डालटेनगंज के मॉड्युलर ओटी के टेंडर का दिलचस्प पहलू एक और भी है। पहले टेंडर की शर्त थी, टेंडर डालनेवाली कंपनी का डालटेनगंज में सर्विस सेंटर होना जरूरी है। टेंडर डालने की अंतिम तिथि को एक शुद्धि पत्र जारी किया गया। उसमें शर्त बदल दी गयी। उसमें डालटेनगंज के अलावा रांची में भी सर्विस सेंटर होनेवाली कंपनियों को टेंडर में भाग लेने की छूट दी गयी। टेंडर डालने के अंतिम दिन ऐसा बदलाव क्यों किया गया और क्या यह नियमानुकूल है, यह भी गंभीर सवाल है। इसी तरह टेंडर डालनेवाली कंपनियों के पास आवश्यक इलेक्ट्रिक लाइसेंस का विवाद एक अलग तकनीकी पेंच और विवाद है।

क्या कहते हैं कार्यपालक और मुख्य अभियंता
कार्यपालक अभियंता महेंद्र राम को उनके 9430783582 पर बार बार फोन करने पर एक बार उन्होंने उठा लिया। निविदा की विसंगतियों के बारे में पूछने पर वह एक स्वर से यह कहते रहे कि आप कार्यालय आइए। बात करते हैं। बार बार यह बताने पर कि रांची से डालटेनगंज आना मुश्किल है, उन्होंने फोन रख दिया। इसके बाद उन्हें ह्वाट्स एप के माध्यम से टेंडर की वैलिडीटी और ई-निविदा के बारे में जानने की कोशिश भी की गयी। लेकिन वह कोई जवाब नहीं दिया। इसी तरह मुख्य अभियंता पंकज कुमार से भी इसी तरह की कोशिश की गयी। उन्होंने ना तो फोन उठाया और ना ही ह्वाट्स एप के माध्यम से पूछे गए सवालों का कोई जवाब ही दिया।
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