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सचिवालय का सच : विभाग नहीं, टेबल क्या है, यह यहां ज्यादा महत्वपूर्ण है

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जीतेंद्र कुमार
कुर्सी का महत्व सभी जगह है। कुर्सी चाहे किसी पद का हो। लेकिन यहां टेबल ज्यादा महत्वपूर्ण है। टेबल के लिए मारा-मारी होती है। जिसकी जितनी पहुंच,वह उतना ही बड़ा खंभा लगाता है। उस टेबल के लिए पैरवी कराता है। पैरवी करनेवालों में आलाधिकारियों से लेकर दिग्गज नेताओं तक इसमें शामिल रहते हैं। कहानी सचिवालय के सच की है। विभागों के टेबल की है। उस टेबल से जुड़े चैनल की है। उस चैनल में रहनेवाले प्रशाखा पदाधिकारियों, अवर सचिवों, उप सचिवों, संयुक्त सचिवों की है, जो टेबल के लिए मर मिटने को उतारू रहते हैं। अपवाद छोड़ दें तो इस टेबल पर जाने से पहले उस विभाग में जाने का जुगाड़ बैठाया जाता हैं। तोड़-जोड़, ऐरवी-पैरवी और हर तिकड़म जुटाया जाता है।


शुरुआत कार्य विभागों से ही करना जरूरी है। पथ निर्माण, ग्रामीण कार्य, भवन निर्माण, जल संसाधन, पेयजल स्वच्छता, ऊर्जा, जैसे विभाग सचिवालय के उन टेबुलों के कोर डिपार्टमेंट हैं। मसलन इन विभागों का बजट आवंटन शाखा, वर्क टाइम एक्सटेंशन शाखा, जेई-एई और ईई का स्थापना तथा आरोप। मालूम है, क्यों। बजट आवंटन में खूब पैसा है। कार्य विभागों के ठेकेदारों को यहीं से राशि मिलती है। और जहां राशि रिलीज होगी, वहां रिलीज राशि कुछ जमीन पर भी जा गिरेगी। वर्क एक्सटेंशन की पूछिए ही नहीं। काम एक साल, दो साल में पूरा करना है। लेकिन ठेकेदार बाबू की लापरवाही या स्थानीय विरोध के कारण जब समय पर काम पूरा नहीं होता है तो वर्क एक्सटेंशन का गोल्डेन पीड़िएड आ जाता है। यहां वर्क एक्सटेंशन देने से पहले कुछ आवश्यक प्रावधानों, शर्तों और नियमों को देखना जरूरी होता है। अगर गलती ठेकेदार की नहीं है तो मामला थोड़ा सीधा हो जाता है। लेकिन गलती ठेकेदार की है तो माल बरसता है। दोनों के लिए। टेबल पर भी और ठेकेदार की किस्मत में भी। एक तो कार्य पूरा करने के लिए समयावधि बढ़ जाती है। जब समयावधि बढ़ जाती है तो लागत भी बढ़ती है। फिर लागत बढ़ाने के लिए कौन नहीं माल खर्चा करेगा।


टेबल की चर्चा हो तो कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के कुछ टेबलों की चर्चा नहीं करना बेमानी होगी। यहां भी तीन-चार तरह के टेबल हैं। डिप्टी कलक्टर की स्थापना और आरोप शाखा। फिर सचिवालय सेवा की स्थापना और आरोप। इसी क्रम में आईएएस की स्थापना। लेकिन यहां उद्देश्य अलग अलग हो जाता है। डिप्टी कलेक्टर की स्थापना शाखा में प्रभाव के साथ साथ आमदनी भी है। कुछ यही स्थिति सचिवालय सेवा की स्थापना और आरोपों से जुड़ी शाखा की है। यहां तो कुत्ता भी कुत्ते का मांस खाने लगता है। आईएएस की स्थापना शाखा का उद्देश्य बदल जाता है। यहां आमदनी कम पहचान और पहुंच का रास्ता सीधा हो जाता है। कुछ और भी विभागों के टेबल है। अगले एपिसोड में...

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