द फॉलोअप डेस्क, रांची:
JPSC-JSSC की नियुक्तियों को रद्द करने के झारखंड सरकार के फैसले को रद्द करने का आदेश बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने सख्त मौखिक टिप्पणी की। सरकार की ओर से इस मामले में समय मांगे जाने पर कोर्ट ने सीआईडी जांच को धीमा बताते हुए यह कहा कि नियुक्तियों को रद्द करने का सरकार ने तुगलकी फरमान जारी किया है। दरअसल, अदालत में सरकार का पक्ष रख रहीं सुप्रीम कोर्ट की वरीय वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के लिए 1 सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन कोर्ट ने महज 48 घंटे का वक्त दिया। कोर्ट ने सुनवाई के लिए शुक्रवार को अगली तिथि निर्धारित की है।
दरअसल, JPSC की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी समेत अन्य भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने के सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में जस्टिस दीपक रौशन की कोर्ट में सुनवाई हुई।

सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया था
गौरतलब है कि 17 अगस्त को कैबिनेट की मीटिंग के बाद सरकार ने 2010 से अब तक हुई JPSC-JSSC की 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया था जिसमें JSSC-CGL के अलावा JPSC द्वारा आयोजित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा समेत अन्य परीक्षाएं शामिल थीं। हालांकि, कोर्ट ने कुछ ही दिनों में सरकार के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। दरअसल, सरकार ने यह फैसला रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC-JSSC की भर्ती परीक्षाओं में सुधार की मांग को लेकर जारी छात्र आंदोलन के आलोक में लिया था।

हाईकोर्ट ने सरकार को 48 घंटे का वक्त दिया
मंगलवार को सुनवाई के दौरान झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने जवाब दाखिल किया। प्रार्थियों का पक्ष अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और चंचल जैन समेत अन्य वकीलों ने रखा। सरकार की ओर से महाधिवक्ता तो वहीं JPSC का पक्ष अधिवक्ता संजोय पिपरवाल ने पक्ष रखा। सरकार की ओर से पेश वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने स्टेटस रिपोर्ट दाखलि करने के लिए और 1 सप्ताह का वक्त देने का आग्रह किया था, लेकिन कोर्ट ने केवल 48 घंटे का ही वक्त दिया।