द फॉलोअप डेस्क
जिमखाना क्लब की जमीन पर बन रहे न्यूक्लियस मॉल को लेकर यूनियन ऑफ इंडिया मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस डिफेंस की याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति राजेश शंकर की कोर्ट ने सुनवाई के बाद मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी। मामले में सेना की ओर से कहा गया कि जिमखाना की जमीन पर जो मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बन रही है वह सेना की जमीन के बगल में है। नियमानुसार सुरक्षा के दृष्टिकोण से सेना की जमीन से 50 मीटर की दूरी पर बिल्डिंग का निर्माण होना चाहिए था। केंद्र सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार एवं अधिवक्ता प्रभात कुमार सिन्हा ने पैरवी की। जबकि, प्रतिवादी चैलिश रियल स्टेट की ओर से सुमित गड़ोदिया ने पक्ष रखा।

45 मीटर से ज्यादा दूरी पर हो रहा निर्माण
कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सेना की ओर से जिस गाइडलाइन का हवाला दिया जा रहा है वह वर्ष 2022 का है। यह गाइडलाइन इसमें अप्लाई नहीं होता। इस मामले में वर्ष 2016 का गाइडलाइन अप्लाई होता है। उक्त गाइडलाइन में कहा गया है कि सेना की जमीन से 10 मीटर की दूरी पर किसी बिल्डिंग का निर्माण हो सकता है। जबकि, वर्तमान में जहां बिल्डिंग का निर्माण कार्य हो रहा है वह सेना की जमीन से 45 मीटर से अधिक दूरी पर है।

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