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रिक्त पदों को लेकर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, अदालत के निर्देशों का पालन करना सरकार लिए बना चुनौती

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झारखंड में संवैधानिक संस्थाओं में लंबे समय से खाली पड़े पदों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एम एस सोनक और राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि चार साल से ज्यादा समय तक संस्थाओं को खाली रखना ठीक नहीं है। सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन और प्रार्थी राजकुमार की ओर से अधिवक्ता वीपी सिंह ने अपनी बात रखी। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक संस्थाएं लोकतंत्र की रीढ़ होती हैं। अगर अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली रहेंगे तो संस्थाओं का कामकाज प्रभावित होगा। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि खाली पद जल्द भरें और संस्थाओं को सक्रिय करें। साथ ही चेतावनी दी कि अगर इसमें और देरी हुई तो कड़े आदेश दिए जाएंगे।यह पहला मौका नहीं है जब हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्ती दिखाई है। पहले भी अदालत ने सरकार को समय पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने और देरी का कारण बताने को कहा था। कुछ मामलों में अदालत ने यह भी सुझाव दिया था कि संस्थाओं को निष्क्रिय न रहने देने के लिए अंतरिम उपाय अपनाए जाएं। इस बार प्रार्थी राजकुमार ने लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग, मुख्य सूचना आयुक्त और अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति को लेकर अवमानना याचिका दायर की थी। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक रिक्त पद होने से प्रशासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर असर पड़ता है। इसलिए त्वरित कार्रवाई जरूरी है।अब देखना यह होगा कि सरकार अदालत के निर्देशों का पालन करती है और पदों की नियुक्ति कितनी जल्दी करती है, या फिर हाईकोर्ट को कड़े कदम उठाने पड़ेंगे।