द फॉलोअप डेस्क
झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ की लगातार मांग, आग्रह और दबाव के बाद भी राज्य सरकार वेतन विसंगति को दूर करने में कोई दिलचस्पी नहीं रही है। प्रशासनिक सेवा संघ की अध्यक्ष रंजीता हेंब्रम और महासचिव राहुल कुमार ने आज मुख्य सचिव अलका तिवारी से मिल कर फिर से इस विसंगति को दूर कराने का आग्रह किया। लेकिन अलका तिवारी ने कहा कि मांग जायज है लेकिन अब तो उनका मात्र एक कार्य दिवस बचा है। वे लोग अब नये मुख्य सचिव के समक्ष अपनी मांगों को फिर से प्रस्तुत करें। पूरे विषय को ढंग से रखें। दरअसल प्रशासनिक सेवा संघ से संयुक्त सचिव और अपर सचिव बननेवाले अधिकारियों को एक ही वेतनमान मिलता है। संयुक्त सचिव से अपर सचिव बनने पर उनके वेतन में किसी प्रकार की बढोत्तरी नहीं होती है। संयुक्त सचिव का पे लेवल 13 और ग्रेड पे-8700 है और अपर सचिव का भी यही वेतनमान है। इसको लेकर झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ लगातार आवाज उठाता रहा है। कार्मिक सचिव, वित्त सचिव और मुख्य सचिव से मिल कर ज्ञापन सौंपता रहा है। उन्हें विसंगति से अवगत कराता रहा है। लेकिन उनकी मांगे लगातार अनसुनी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार संबंधित संचिका वित्त विभाग में जाकर फंसी हुई है। इस मुद्दे पर वित्त विभाग सकारात्मक पहल करने को ही तैयार नहीं है।

क्यों फंस रहा है मामला
दरअसल यह मामला डायरेक्ट आईएएस और राज्य प्रशासनिक सेवा के बीच में वेतनमान की सुप्रीमेसी से जुड़ा है। झारखंड प्रशासनिक सेवा का डिमांड है कि संयुक्त सचिव और अपर सचिव का वेतनमान समान है। यह गलत है। संयुक्त सचिव से अपर सचिव में प्रोन्नति दिए जाने पर वेतन बढोत्तरी का भी लाभ मिलना चाहिए। अब मामला यहां इस तरह उलझता है कि राज्य प्रशासनिक सेवा से विशेष सचिव बननेवाले अधिकारियों का ग्रेड पे 8900 है और डायरेक्ट आईएएस से विशेष सचिव बनने पर भी ग्रेड पे 8900 है। इसलिए अगर राज्य प्रशासनिक सेवा से अपर सचिव बननेवाले अधिकारियों को 8900 का ग्रेड पे देने पर इस सेवा से विशेष सचिव बनने पर उन्हें 10000 का ग्रेड पे देना होगा। जबकि डायरेक्ट आईएएस अधिकारियों को सचिव रैंक में प्रोन्नति मिलने पर 10000 का ग्रेड पे मिलता है। लेकिन राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का तर्क है कि जब डायरेक्ट आईएएस अधिकारी एसडीओ रैंक में आते हैं तो उनका पे लेवल 10 होता है जबकि हमारा पे लेवल 11. झारखंड प्रशासनिक सेवा के संयुक्त सचिव का पे लेवल 13 होता है तो उनका 12. इसलिए पे-लेवल और ग्रेड पे नहीं देखा जाना चाहिए। क्योंकि उनकी प्रोन्नति बहुत कम अवधि और तय तिथि पर होती जाती है, जबकि झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को अपर सचिव और विशेष सचिव बनने में 25-30 वर्ष का समय लगता है।
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