द फॉलोअप,रांची
झारखंड कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल वर्तमान में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव हैं। एमबीबीएस की पढाई के बाद आईएएस अधिकारी बने अमिताभ कौशल के बारे में कहा जाता है कि वह सरकारी नियम-कानूनों पर बारीक नजर रखते हैं। यही कारण भी रहा कि राज्य में जब शराब घोटाला उफान पर था। शराब के टेंडर में होने वाले खेल से राज्य सरकार कलंकित होने लगी तो उत्पाद विभाग की जिम्मेदारी इन्हें सौंपी गयी। इनकी देखरेख में कुछ माह पूर्व शराब के 1576 खुदरा दुकानों का टेंडर हुआ। किसी भी जिले से किसी प्रकार की अनियमितता की शिकायत नहीं मिली। टेंडर मैनेज करने का कोई आरोप नहीं लगा। इस तरह अमिताभ कौशल के नेतृत्व में राज्य में शराब का धंधा एक बार फिर पटरी पर आता जा रहा है। जबकि इससे पूर्व उत्पाद सचिव, उत्पाद आयुक्त व अन्य पदों पर रहे कई बड़े अधिकारियों को जेल जाना पड़ा।

हाल में सरकार को फिर एक नये घोटाले ने परेशान करना शुरू किया। हजारीबाग, बोकारो सहित राज्य के कई जिलों में ट्रेजरी से करोड़ों की फर्जी निकासी का मामला सामने आने लगा। एसएसपी ऑफिस के एकाउंटेंट और अन्य की मदद से रिटायर और मृत पुलिसकर्मियों के नाम पर यह अवैध निकासी की गयी। विपक्ष इस घोटाले को चारा घोटाला से जोड़ने लगा। तूल देने लगा। सरकार ने अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन कर उबाल को ठंढ़ा किया। सच यह भी रहा कि अमिताभ कौशल के नेतृत्व में जारी जांच पर अब तक कोई सवाल खड़ा नहीं हुआ है। घोटाले की जांच सही दिशा में बढ़ती बतायी जा रही है।
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पिछले एक महीने से जेपीएससी और जेएसएससी की प्रतियोगिता परीक्षाओं में हुए भ्रष्टाचार को लेकर छात्रों में उबाल था। सरकार ने छात्रों की सभी प्रमुख मांगों को पूरा कर दिया। लेकिन इसके साथ साथ जेपीएससी और जेएसएससी में सुधार सरकार के सामने एक गंभीर चुनौती है। सरकार ने फिर अमिताभ कौशल को सुधार की यह महती जिम्मेदारी सौंपी है। इसलिए कि उनकी कार्यशैली और निष्ठा पर कोई सीधा सवाल नहीं खड़ा करता। उंगली नहीं उठाता। ब्यूरोक्रेसी के जानकार बताते हैं कि अमिताभ कौशल की इसी कौशल के कारण प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति जैसे बड़े नेताओं के झारखंड दौरे के समय, कोऑर्डिनेशन की महती जिम्मेदारी उन्हें ही सौंपी जाती है। क्योंकि प्रोटोकॉल से लेकर तकनीकी जानकारी समझ के साथ साथ प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति कार्यालय से संवाद में वे माहिर माने जाते हैं।
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घाटशिला से शुरू हुआ जिला प्रशासन का सफर
प्रशासनिक करियर के शुरुआती दौर में अमिताभ कौशल ने घाटशिला के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) के तौर पर काम किया। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार वे अगस्त 2003 से जुलाई 2005 तक घाटशिला में SDO रहे। इसके बाद वे पूर्वी सिंहभूम में उप विकास आयुक्त (DDC) की जिम्मेदारी निभायी। गढ़वा और पलामू के उपायुक्त भी रहे। इसके बाद उन्होंने झारखंड राज्य शिक्षा मिशन में स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर के तौर पर भी काम किया। वर्ष 2010 में वे रामगढ़ के फिर उपायुक्त बने। इसके बाद वे जमशेदपुर के भी डीसी बनाए गए। डॉक्टर होने के कारण सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के मिशन डायरेक्टर भी बनाए गए। सचिव पद पर प्रोन्नति के बाद अमिताभ कौशल खाद्य आपूर्ति,भू-राजस्व, कल्याण, पर्यटन, कला संस्कृति, योजना एवं विकास, वाणिज्यकर विभाग जैसे कई अन्य विभागों के सचिव रहे।
