द फॉलोअप डेस्क
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र अडाणी पावर प्लांट को लेकर काफी हंगामेदार रहा था। सत्ताधारी दल इंडिया गठबंधन के दो सीनियर मोस्ट एमएलए प्रदीप यादव और स्टीफन मरांडी ने गोड्डा में अडाणी पावर प्लांट का मुद्दा उठाया था। 19 मार्च को अपने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से दोनों विधायकों ने सदन में सरकार को घेरा था। मामला काफी तूल पकड़ा। सत्ता पक्ष के ही विधायकों की मांग पर थोड़ी असहज स्थिति भी पैदा हुई थी। लेकिन प्रभारी मंत्री की हैसियत से भू-राजस्व मंत्री दीपक बिरुआ ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठन का आश्वासन देकर सदन में उबल रहे विधायकों को शांत करा दिया।

लेकिन पांच महीने बीत जाने और अब मानसून सत्र शुरू हो जाने के बाद भी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन नहीं हो सका। यह सरकार का कहना है। यह सरकार के दस्तावेज का सच है। मानसून सत्र में पेश एटीआर में राज्य सरकार ने ही कहा है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठन का मामला प्रक्रियाधीन है। वह तब जबकि प्रदीप यादव ने 24 जून को ही विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिख कर दीपक बिरुआ द्वारा दिए गए आश्वासन की याद दिला चुके थे। उस पत्र में प्रदीप यादव ने सदन में दिए गए आश्वासनों को याद दिलाते हुए यह भी लिखा था कि दीपक बिरुआ द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गटन किया जाना था। लेकिन मानसून सत्र आनेवाला है, अब तक कमेटी का गठन नहीं हुआ। यह सदन की अवमानना की स्थिति पैदा करता है।
.jpeg)
विधायकों के क्या है आरोप
प्रदीप यादव और स्टीफन मरांडी ने अपने ध्यानाकर्षण सूचना में आरोप लगाया है कि गोड्डा जिला एवं पोड़ैयाहाट अंचल में अडाणी पावर प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण में एसपीटी एक्ट का खुला उल्लंघन किया गया। भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का भी घोर उल्लंघन किया गया। रातो रात जमीन की कीमत 46 लाख रुपए प्रति एकड़ से घटा कर 3.25 लाख प्रति एकड़ और फिर 12.5 लाख रुपए प्रति एकड़ कर दिया गया। इसके अलावा झारखंड राज्य ऊर्जा नीति 2012 के शर्तों का भी उल्लंघन किया गया। इस ऊर्जा नीति में राज्य के पावर प्लांटों उत्पादित बिजली का 25 फीसदी झारखंड को देने की बाध्यता है। जबकि एमओयू में इस प्लांट के इतर अन्य स्रोतों से झारखंड को 25 फीसदी बिजली देने की शर्त जोड़ दी गयी। उसके बाद भी 25 फीसदी बिजली झारखंड को नहीं मिल रही है। एसपीटी एक्ट में केवल पब्लिक पर्पस से जमीन अधिग्रहण की बात है। लेकिन यहां किसी निजी कंपनी को अधिग्रहित कर जमीन दी गयी। इसके अलावा अडाणी पावर प्लांट के साथ हुए समझौते में कंपनी को स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित कर प्लांट में नौकरी देने, अस्पताल एवं स्कूल का निर्माण करने की भी शर्तें है। लेकिन न तो अस्पताल बना और ना ही स्कूल। अन्य नागरिक सुविधाएं भी कंपनी द्वारा अब तक उपलब्ध नहीं करायी गयी।

रैयतों ने प्लांट के सामने दिया था धरना
अडाणी पावर प्लांट से विस्थापित हुए अथवा जिनकी जमीन अधिग्रहित हुई है, ऐसे रैयतों ने इस वर्ष प्लांट के सामने धरना भी दिया था। झारखंड विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की थी। उस समय राज्य के उद्योग सह श्रम नियोजन मंत्री संजय प्रसाद यादव ने रैयतों को आश्वासन देकर उनका धरना समाप्त कराया. उनके गुस्से को ठंढा किया था।
