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द फॉलोअप इम्पैक्ट : अनाथ मंजू और सुशील की कहानी CM हेमंत तक पहुंची, मिलेगी हरसंभव मदद 

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द फॉलोअप डेस्क

द फॉलोअप की खबर का बड़ा असर हुआ है। जामताड़ा के गोपालपुर पंचायत स्थित कदमपारा टोला के अनाथ आदिवासी भाई-बहन मंजू सोरेन और सुशील सोरेन की दर्दभरी कहानी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक पहुंच गई है। खबर और वीडियो देखने के बाद मुख्यमंत्री ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए जामताड़ा के उपायुक्त को निर्देश दिया है कि पूरे मामले की जांच कर दोनों बच्चों की शिक्षा के लिए हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही की उन्हें अवगत भी कराया जाए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जामताड़ा डीसी को निर्देश दिया है कि मामले की जांच कर मंजू और सुशील की शिक्षा के लिए हर आवश्यक सहायता सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही बच्चों की अभिभावक बेलमुनि हेंब्रम को भी सभी पात्र सरकारी योजनाओं से जोड़ने की कार्रवाई की जाए और इसकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री के इस निर्देश के बाद उम्मीद जगी है कि अब दोनों मासूमों को शिक्षा और सरकारी सहायता का अधिकार मिल सकेगा।

 


मंजू और सुशील की बेबसी ने झकझोर दिया था सभी को
The Followup ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में दिखाया था कि महज सात साल की मंजू सोरेन अपने चार वर्षीय भाई सुशील सोरेन की देखभाल करने के साथ घर की पूरी जिम्मेदारी भी संभाल रही है। साल भर के भीतर पहले आग की घटना में मां ललिता मुर्मू की मौत हो गई और कुछ महीनों बाद पिता साहब लाल सोरेन का भी निधन हो गया। माता-पिता के गुजरने के बाद दोनों मासूम पूरी तरह अनाथ हो गए। बच्चों ने अपनी मासूम इच्छा जताई थी कि वे भी पढ़ना चाहते हैं, लेकिन जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई शुरू नहीं हो पा रही है।


बड़ी मां के सहारे कट रही जिंदगी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि दोनों बच्चे अपनी बड़ी मां बेलमुनि हेंब्रम के सहारे जीवन बिता रहे हैं। बेलमुनि खुद ईंट-भट्ठे में मजदूरी कर किसी तरह परिवार चला रही हैं। आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर चिंता लगातार बनी हुई थी। उन्होंने सरकार से अपील की थी कि यदि समय रहते मदद मिल जाए तो दोनों बच्चों का जीवन संवर सकता है। यह पूरी कहानी The Followup के वीडियो के माध्यम से लोगों और सरकार तक पहुंची।

 

 

Tags - Jharkhand Hemant Soren Jamtara The Followup Education