द फॉलोअप डेस्क:
बिष्टुपुर स्थित डीडी बार के बाहर हुई हिंसक घटना में गंभीर रूप से घायल प्रत्युष आनंद के पिता चंदन सिंह ने सोशल मीडिया पर भावुक पोस्ट साझा कर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि वर्षों तक पार्टी को अपना परिवार मानकर पूरी निष्ठा से काम करने के बावजूद संकट की इस घड़ी में उन्हें संगठन का साथ नहीं मिला। गौरतलब है कि 27 जून की रात को करीब साढ़े 11 बजे बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार में विवाद के बाद प्रत्युष और उनके साथी हिमांशु सिंह पर जानलेवा हमला हुआ था। इस हमले में हिमांशु सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि प्रत्युष अभी भी जिंदगी और मौत के बीच लड़ रहे हैं।
संकट की घड़ी में अकेला महसूस करता हूं!
चंदन सिंह ने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा कि भाजपा की सदस्यता लेने के बाद उन्होंने संगठन को परिवार की तरह माना और तन, मन व धन से पार्टी की सेवा की। चुनाव, संगठनात्मक कार्यक्रम और जनहित के अभियानों में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और नेताओं के सुख-दुख में वह हमेशा आगे रहे, लेकिन आज जब उनका परिवार सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है, तब वह खुद को पूरी तरह अकेला महसूस कर रहे हैं।

वरीय पदाधिकारियों ने फोन पर खबर नहीं ली
उन्होंने बताया कि उनका बेटा प्रत्यूष आनंद डीडी बार के बाहर हुई घटना के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गया। आरोप लगाया कि घटना के बाद भी पुलिस की मौजूदगी में पीसीआर वैन के भीतर और बाहर हमलावरों ने उसके साथ मारपीट की। वर्तमान में प्रत्यूष अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है तथा बेहतर इलाज के लिए परिवार शहर से बाहर प्रयासरत है।
चंदन सिंह ने पोस्ट में कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी कम-से-कम एक फोन कॉल या हालचाल लेकर परिवार का मनोबल बढ़ाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वर्षों की निष्ठा और समर्पण की यही कीमत है और क्या कार्यकर्ता सिर्फ तब तक ही महत्वपूर्ण होता है, जब तक वह पार्टी के लिए काम करता रहे।

पीड़ित पिता की भावनाओं की सहज अभिव्यक्ति
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह पोस्ट किसी राजनीतिक लाभ, सहानुभूति या विवाद के लिए नहीं, बल्कि एक पीड़ित पिता की भावनाओं की अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि उनकी पहली और अंतिम प्राथमिकता अपने बेटे प्रत्यूष आनंद का जीवन बचाना है तथा ईश्वर से उसके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना की है। साथ ही लिखा कि संकट की घड़ी में ही अपनों की वास्तविक पहचान होती है।