द फॉलोअप, रांची
देश में खनिज और खनिजयुक्त भूमि पर राज्यों की ओर से लगाए जाने वाले अतिरिक्त कर, उपकर (सेस) या किसी अन्य शुल्क पर रोक लगाने का रास्ता साफ हो गया है। लोकसभा ने बुधवार को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को हंगामे के बीच पारित कर दिया। इस संशोधन का सीधा असर झारखंड पर भी पड़ेगा, जहां सरकार ने खनिज संपदा से जुड़े मामलों में सेस लगाने की व्यवस्था लागू की थी। इस अधिनियम से झारखंड की आर्थिक स्थिति बुरी तरह प्रभावित होगी। एक अनुमान के तहत झारखंड को लगभग 8-10 हजार करोड़ का प्रति वर्ष नुकसान होगा। इसका असर मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना सहित कई अन्य योजना और विकास पर पड़ेगा। हालांकि विधेयक के कानून बनने के लिए अभी राज्यसभा से पारित होना और राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी है।
विधेयक में प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकारें खनिज अधिकारों या खनिजयुक्त भूमि पर अपनी ओर से कोई अतिरिक्त कर, उपकर या अन्य शुल्क नहीं लगा सकेंगी। खनिज भूमि के संबंध में किसी भी तरह का कर या शुल्क केवल केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों, सीमाओं और रॉयल्टी के आधार पर ही तय किया जा सकेगा।
.jpeg)
पहले से वसूली गई राशि वापस नहीं होगी
विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कानून लागू होने से पहले राज्यों द्वारा वसूला या जमा किया जा चुका कर/सेस वापस नहीं किया जाएगा। यानी पूर्व में वसूली गई राशि का रिफंड नहीं होगा, लेकिन आगे इस तरह का अतिरिक्त सेस लगाने पर रोक रहेगी। इस प्रावधान से राज्य सरकार द्वारा केंद्र से लगातार की जा रही 1.36 लाख करोड़ की मांग कमजोर पड़ेगी।

झारखंड पर क्यों पड़ेगा असर?
झारखंड सरकार ने झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस एक्ट 2024 के माध्यम से खनिजयुक्त भूमि पर सेस लगाने की व्यवस्था की थी। सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले के बाद राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति को लेकर बहस तेज हुई थी। झारखंड इस दिशा में कदम उठाने वाला शुरुआती राज्य बना था। राज्य सरकार को उम्मीद थी कि खनिज से प्राप्त सेस की राशि का इस्तेमाल सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकेगा। इसके तहत मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना जैसी योजनाओं को आर्थिक आधार देने की भी बात सामने आई थी।

केंद्र ने बताया आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी
केंद्र सरकार का तर्क है कि संशोधन का उद्देश्य खनन क्षेत्र में एकरूपता, स्थिरता और स्पष्टता सुनिश्चित करना है। सरकार के मुताबिक इससे खनन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलेगा और देश की आर्थिक वृद्धि तथा विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। हालांकि, अब इस प्रावधान को लेकर राज्यों के अधिकार और केंद्र-राज्य के बीच राजस्व बंटवारे पर नई बहस शुरू होने की संभावना है। खासकर झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों के लिए यह संशोधन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
