द फॉलोअप डेस्क
देश के सबसे बड़े कारोबारी टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, वह तत्काल पद नहीं छोड़ेंगे और फरवरी 2027 तक अपने मौजूदा कार्यकाल में बने रहेंगे। एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब 18 अगस्त को टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) होने वाली है। इस बैठक में उनके बोर्ड में निदेशक के रूप में बने रहने को लेकर भी फैसला होना है। एन चंद्रशेखरन वर्ष 2017 से टाटा संस के चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) रह चुके हैं। वह वर्ष 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे और समूह में अपने करीब चार दशक लंबे करियर के दौरान कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं।
चंद्रशेखरन ने क्या कहा
इस्तीफे के बाद जारी बयान में चंद्रशेखरन ने कहा कि टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 वर्ष पूरे करना उनके लिए बेहद संतोष और गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से टाटा संस का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी रही है। उन्होंने बताया कि उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से उनके कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे टाटा संस की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमिटी और बोर्ड ने मंजूरी दी थी। हालांकि, बोर्ड में सर्वसम्मति नहीं बनने के कारण इस प्रस्ताव पर आगे फैसला नहीं हो सका।
टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच मतभेद की चर्चा
चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को लेकर टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच कंपनी के भविष्य को लेकर कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। बताया जा रहा है कि टाटा संस के भविष्य में शेयर बाजार में लिस्टिंग के मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों की राय अलग थी। इसके अलावा बोर्ड में प्रतिनिधित्व और कंपनी के संचालन से जुड़े मामलों पर भी मतभेद की बात सामने आई थी। सूत्रों के अनुसार, टाटा संस बोर्ड चंद्रशेखरन को अगले पांच साल का विस्तार देने के पक्ष में था, जबकि टाटा ट्रस्ट की ओर से 65 वर्ष की उम्र के रिटायरमेंट नियम का हवाला देते हुए सीमित कार्यकाल के विकल्प पर विचार किया जा रहा था।.jpeg)
रतन टाटा के निधन के बाद बदले समीकरण
रतन टाटा के निधन के बाद टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच अधिकारों, शेयरहोल्डिंग और नियंत्रण को लेकर नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा टाटा समूह के भविष्य के नेतृत्व को लेकर अहम माना जा रहा है। अब सबकी नजर 18 अगस्त को होने वाली AGM पर है, जहां बोर्ड संरचना और आगे की रणनीति को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।