द फॉलोअप, रांची
सुप्रीम कोर्ट 2 सितंबर को झारखंड सहित अन्य राज्यों में डीजीपी की नियुक्ति संबंधी मामलों की सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में झारखंड के अलावा कर्नाटक, गुजरात और उड़ीसा के डीजीपी के मुद्दों पर भी सुनवाई हुई। झारखंड में नियमित डीजीपी की नियुक्ति के मामले में अदालत ने विचार करने के लिए इससे संबंधित सभी कागजात और दस्तावेज Amicus Curiae (न्याय मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन को सौंपने का आदेश दिया। रामचंद्रन पूरे मामले का अध्ययन करने के बाद, उससे सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाश सिंह बनान भारत सरकार मामले में दिए ऐतिहासिक फैसले के आलोक में राज्यों की नियमित डीजीपी की नियुक्ति का आदेश दे रखा है। लेकिन अलग अलग राज्यों ने डीजीपी की नियुक्ति के लिए अपने अपने ढंग से नियमावली बना रखी है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दायर है। उसमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट उसी याचिका की सुनवाई कर रहा है। इसी क्रम में झारखंड में भी नियमित डीजीपी की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है।सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों ने शीर्ष अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए आवश्यक कदम उठाए हैं जबकि ओडिशा और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से भी अपने-अपने हलफनामे दाखिल कर दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने DGP की नियुक्ति मामले में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा सुझाए गए तीन वरिष्ठतम आईपीएस के पैनल में से ही नियमित DGP का चयन अनिवार्य बताया है। चयन के बाद अधिकारी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्षों का होना चाहिए। झारखंड में कार्यवाहक व्यवस्था या नियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर पूर्व में भी सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गयी है। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा न्याय मित्र से नोट मांगे जाने के बाद 2 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और फैसला, झारखंड को भी विशेष रूप से प्रभावित करेगा।
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