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सरायकेला : 3 माह पहले सरकारी टीचर बनीं सुलेखा को नहीं मिली पोस्टिंग, अब सड़क हादसे में मौत; 2 बच्चे अनाथ

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सरायकेला:

झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में सोनुवा प्रखंड अंतर्गत भालुरूंगी गांव निवासी सुलेखा महतो की 24 जून को सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। खबर इतनी सामान्य नहीं है। सुलेखा महतो सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा पास करके सरकारी शिक्षक बनी थीं। 3 महीने पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों उनको नियुक्ति पत्र मिला था, लेकिन किसी स्कूल में पदस्थापना नहीं मिली। सुलेखा पिछले 3 महीने से प्रतिदिन सरायकेला जिला मुख्यालय स्थित जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के कार्यालय में जाकर हाजिरी लगाती थीं, इसी आस में कि जल्द पदस्थापना मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा था। बीते 24 जून को सरायकेला से लौटने के क्रम में भारी वाहन की चपेट में आने से उनकी दुखद मौत हो गई। हादसे में उनका देवर घायल हो गया। 

24 जून को सरायकेला से लौटते समय हुआ हादसा
बताया जा रहा है कि 24 जून को भी सुलेखा महतो अपने देवर के साथ स्कूटी से जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर में हाजिरी लगाने गई थीं। वहां से लौटने के क्रम में तेज रफ्तार बेकाबू हाईवा ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। सुलेखा सड़क पर गिर पड़ीं और तभी वहां से गुजर रहा एक भारी वाहन उन्हें कुचल गया। गंभीर रूप से जख्मी सुलेखा ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि उनके देवर गंभीर रूप से घायल हो गए। गौरतलब है कि सुलेखा पिछले 3 महीने से अपने 2 छोटे बच्चों को छोड़कर डीईओ के दफ्तर जाती थीं। सुलेखा की मौत के बाद उन मासूम बच्चों के सिर से मां का साया हट गया है। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। 

3 महीने पहले मिला था सरकारी टीचर का नियुक्ति पत्र
गौरतलब है कि सोनुवा प्रखंड के भालुरूंगी गांव  निवासी सुलेखा जीवन में अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थीं। उन्होंने काफी संघर्ष से पढ़ाई करके स्नातक, बीएड और फिर झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा पास की। सहायक आचार्य भर्ती परीक्षा में चयनित होकर सरकारी शिक्षिका के रूप में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों नियुक्ति पत्र हासिल किया। सुलेखा समेत पूरे परिवार को लगा था कि अब दिन बहुरेंगे। आर्थिक स्थिति सुधरेगी और बच्चों का भविष्य भी सुरक्षित होगा, लेकिन 24 जून  को एक हादसे ने परिवार की सारी उम्मीदों को खत्म कर दिया। सारी खुशियां छीन लीं। बचा है तो केवल दर्द, निराशा और अंतहीन हताशा। 

नियुक्ति पत्र मिलने पर भी क्यों नहीं हुई पदस्थापित
अब सवाल उठ रहे हैं कि नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद 3 महीने से उन्हें किसी विद्यालय में पदस्थापित क्यों नहीं किया गया। आखिर क्यों उनको महिला होने के बावजूद रोजाना सरायकेला जिला मुख्यालय स्थित जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर में हाजिरी लगाने को बुलाया जाता था। परिजनो का कहना है कि यदि वक्त रहते सुलेखा को पोस्टिंग मिल जाती तो यह अनहोनी नहीं होती। 
 

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