द फॉलोअप, रांची
बिहार, गुजरात, त्रिपुरा समेत कई अन्य राज्यों के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को वर्ष 2025 की रिक्ति के विरुद्ध आईएएस में प्रमोशन दे दिया गया। डीओपीटी ने आईएएस में प्रमोशन संबंधी आदेश जारी कर दिया। बिहार के 14, गुजरात के 17 और त्रिपुरा के छह अधिकारियों को आईएएस में प्रमोशन दिया गया है। देश के लगभग 15 से अधिक राज्यों ने भी यूपीएससी को विचारण सूची भेज दिया है। अब उन राज्यों के अधिकारियों को प्रोन्नति देने के लिए यूपीएससी बैठक की तिथि निर्धारित करने में लगा है। लेकिन झारखंड की स्थिति यह है कि राज्य सरकार ने अब तक यूपीएससी को राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की सूची ही नहीं भेजी है। यहां मालूम हो कि झारखंड में राज्य प्रशासनिक सेवा से अखिल भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रोन्नति के लिए वर्ष 2025 में कुल 14 रिक्तियां है। इसके अलावा एक रिक्ति गैर प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए है। विचारण सूची में रिक्ति का तीन गुणा अधिकारियों का नाम भेजा जाता है। इस तरह झारखंड से कुल 42 अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजे जाने हैं।
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हाईकोर्ट की रोक हटने के बाद भी कार्मिक नहीं भेज रहा यूपीएससी को सूची
राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियं की वरीयता सूची को लेकर राधेश्याम प्रसाद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। वह वरीयता सूची में अपना नाम नीचे हो जाने के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। बिहार पुनर्गठन विधेयक 2000 के अनुसार अपनी इच्छा से बिहार से झारखंड आनेवाले सरकारी कर्मियों को वरीयता सूची में नीचे रखने का प्रावधान किया गया है। इस कारण राधेश्याम प्रसाद को वरीयता सूची में नाम नीचे हो गया। इससे उनका नाम यूपीएससी को भेजी जानेवाली सूची में शामिल नहीं हो रहा। इसको लेकर वह हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। इससे यूपीएससी को भेजी जानेवाली सूची का मामला उलझ गया। इसके बाद बीपीएससी के 39 एवं 40 बैच के अधिकारियों ने इंटर लोकेट्री पेटीशन दायर किया। हाईकोर्ट से आग्रह किया कि इस विवाद में वे क्यों प्रभावित हो रहे हैं। इसके बाद 10 दिसंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सूची भेजने पर कोई रोक नहीं है। हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद महाधिवक्ता ने भी राज्य सरकार को स्पष्ट किया था कि तीन गुणा सूची भेजने में हाईकोर्ट की कहीं कोई रोक नहीं। लगभग दो महीना बीतने के बाद भी कार्मिक यूपीएससी को नहीं भेजा है। इसको लेकर कार्मिक को लेकर राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों में कई तरह की चर्चा भी हो रही है। संयुक्त सचिव स्तर के एक अधिकारी उसके केंद्र में हैं।

कार्मिक पर दोहरी नीति का आरोप
पिछले दिनों कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने संयुक्त सचिव से अपर सचिव, उप सचिव से संयुक्त सचिव रैंक में प्रोन्नति दे दी। लेकिन एसडीएम एवं समकक्ष रैंक से उप सचिव में प्रमोशन नहीं दिया जा रहा। जबकि उप सचिव रैंक के लगभग 100 से अधिक पद रिक्त हैं। इसका दुष्परिणाम यह हो रहा है कि उपर के पद रिक्त नहीं होने के कारण बेसिक ग्रेड के अधिकारियों को ऊपर के पदों पर प्रोन्नति नहीं मिल रही। साथ ही बेसिक ग्रेड का पद रिक्त नहीं होने के कारण जेपीएससी द्वारा ली जाने वाली परीक्षा में सिविल सेवा के पदाधिकारियों की रिक्ति कम हो रही है।
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