द फॉलोअप डेस्क:
झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए 18 जून को वोटिंग होगी। 2 सीटें खाली हैं और एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का प्रत्याशी होना तय है। दूसरी सीट के लिए कांग्रेस पार्टी ने दावा ठोका है। उम्मीदवारी को लेकर अभी किसी भी दल ने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन इसी बीच झारखंड कांग्रेस के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष और पिछले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे शहजादा अनवर ने अपनी उम्मीदवारी पेश की है। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर बकायदा उन्हें राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाने की मांग की है। उनका तर्क है कि चूंकि लोकसभा चुनाव में किन्ही कारणों से पार्टी ने किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया, इसलिए अभी अवसर है कि राज्यसभा में झारखंड के अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से उन्हें उम्मीदवार बनाया जाए।

झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं
शहजादा अनवर ने यह भी कहा है कि चूंकि पिछली बार संख्याबल के लिहाज से एक सीट पर शिबू सोरेन विजयी रहे थे, जबकि दूसरी सीट पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था। चूंकि, इस राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के पास 56 विधायकों का पर्याप्त आंकड़ा है और जीत के लिए 28 विधायकों का प्रथम वरीयता मत चाहिए तो उनके जीत की संभावना है। एक प्रत्याशी झामुमो का होगा और दूसरे प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस की ओर से उनके नाम पर विचार किया जाए।
गौरतलब है कि शहजादा अनवर झारखंड कांग्रेस में जिलाध्यक्ष, प्रदेश प्रवक्ता, राज्य कार्यसमिति सदस्य, प्रदेश सचिव और कार्यकारी अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं।

अल्पसंख्यक समुदाय की ओर से मांगी उम्मीदवारी
शहजादा अनवर ने मल्लिकार्जुन खड़गे को लिखा है कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता के सम्मान, गरिमा और प्राकृतिक न्याय के आधार पर उनको उम्मीदवार बनाना चाहिए और गठबंधन के भीतर पार्टी को उनके नाम पर सहमति भी बनाना चाहिए। शहजादा अनवर ने कहा कि वह राज्यसभा सांसद के रूप में प्रभावी ढंग से कांग्रेस पार्टी के हितों की रक्षा करेंगे। झारखंड के हितों को सुरक्षित रखेंगे और देश में धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, किसानों, मजदूरों, युवाओं और वंचितों की आवाज को मजबूती से उठांगे।
उन्होंने कहा कि राज्यभर के अल्पसंख्यक समुदायों के बीच व्यापक सहमति और बढ़ती हुई मांग है कि 2026 के राज्यसभा चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवार को मौका दिया जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया है कि कई पार्टी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का मानना है कि उनकी उम्मीदवारी पार्टी के जमीनी जुड़ाव को और मजबूत करेगी और समावेशी प्रतिनिधित्व एवं सामाजिक न्याय के प्रति कांग्रेस पार्टी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करेगी।