गिरिडीह
शहर के नवजीवन नर्सिंग होम में मंगलवार रात एक गर्भवती महिला के इलाज को लेकर हुए हंगामे पर गिरिडीह के वरिष्ठ चिकित्सकों ने कड़ी आपत्ति जताई है। चिकित्सकों ने कहा है कि अस्पतालों में इस तरह का व्यवहार न केवल स्वास्थ्य कर्मियों को भयभीत करता है, बल्कि अन्य मरीजों के इलाज में भी गंभीर बाधा उत्पन्न करता है। चिकित्सकों ने कहा कि क्या हंगामे के माहौल में किसी भी मरीज का बेहतर इलाज संभव है? डॉक्टर और मरीज अलग नहीं, बल्कि एक ही टीम के हिस्से हैं। हमारा उद्देश्य मरीज की बेहतरी ही है, न कि किसी को परेशान करना।”
वरिष्ठ चिकित्सकों ने स्पष्ट किया कि कुछ मामलों में मरीज को समय रहते अन्य विशेषज्ञ या अधिक सुविधाओं वाले अस्पताल में रेफर करना मरीज के हित में ही होता है। इसे दुर्भावना या लापरवाही मान लेना नासमझी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग अस्पताल में हंगामा करते हैं, क्या वे वहां भर्ती अन्य मरीजों की जान से खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं? चिकित्सकों ने कहा कि अगर इसी तरह डॉक्टरों को डराने-धमकाने की प्रवृत्ति चलती रही, तो आगे चलकर कोई भी अस्पताल गंभीर मरीजों को भर्ती करने से कतराएगा, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

क्या है पूरा मामला?
घटना हीरोडीह थाना क्षेत्र के रेंबा जरीडीह निवासी एमडी मुन्ना अंसारी की पत्नी रोहन प्रवीण से जुड़ी है। मंगलवार को उन्हें नवजीवन नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर अमिता राय द्वारा जांच के बाद बताया गया कि मरीज के शरीर में खून की भारी कमी है और उसे तुरंत रक्त चढ़ाना होगा।
पुलिस ने संभाली स्थिति, चिकित्सकों ने की सराहना
घटना की सूचना पर नगर थाना प्रभारी ज्ञान रंजन मौके पर पहुंचे। लेकिन स्थिति नियंत्रण में न आने पर डीएसपी कौसर अली को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने सूझबूझ के साथ स्थिति को संभाला। वरिष्ठ चिकित्सकों ने डीएसपी कौसर अली का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने भीड़ की स्थिति को जिस शांति और कुशलता से संभाला, वह सराहनीय है।
डॉक्टर अमिता राय ने स्पष्ट किया कि मरीज की हालत तेजी से बिगड़ रही थी। रक्त देर से पहुंचा, जिससे तत्काल रेफर करना ही एकमात्र विकल्प बचा था। घटना के बाद स्थानीय लोगों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नाराजगी देखी गई। वहीं पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रशासन द्वारा CCTV फुटेज और सभी जरूरी विवरण पुलिस को सौंपे जा रहे हैं।
