जामताड़ा
डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी जामताड़ा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो हैरान भी करती है और सरकारी दावों की पोल भी खोलती है। जिले के करमाटांड़ प्रखंड अंतर्गत बागबेर गांव में मोबाइल नेटवर्क की समस्या इतनी विकराल हो चुकी है कि ग्रामीणों को फोन पर बात करने के लिए पेड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है। गांव में बड़ी टेलीकॉम कंपनियों का नेटवर्क पूरी तरह गायब रहता है, जिससे नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी की। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की जमीन पर मोबाइल सिग्नल का नामोनिशान नहीं है। जब भी किसी को अपने रिश्तेदारों या जरूरी काम के लिए फोन करना होता है, तो उन्हें ऊंचे पेड़ों पर चढ़ना पड़ता है। कुछ लोग नेटवर्क की तलाश में मीलों दूर खेतों की तरफ भटकते हैं, तो कुछ ग्रामीण कुएं के पास या उसके ऊपर बैठकर नेटवर्क पकड़ाने की नाकाम कोशिश करते हैं। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कैसे लोग एक कॉल करने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं।

अंधेरे में टॉर्च लेकर पेड़ पर चढ़ना पड़ता है
स्थानीय निवासी कासिम अंसारी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, "कई बार घंटों मशक्कत के बाद भी फोन नहीं लगता। सबसे ज्यादा डर रात के समय लगता है। अगर कोई अचानक बीमार हो जाए और एम्बुलेंस बुलानी पड़े, तो घने अंधेरे में टॉर्च लेकर पेड़ पर चढ़ना पड़ता है। यह बेहद खतरनाक है।" वहीं कलाम अंसारी ने बताया कि वे हर महीने मोबाइल का महंगा रिचार्ज कराते हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर उन्हें सिर्फ धोखा मिल रहा है। नेटवर्क न होने के कारण गांव के बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई पूरी तरह ठप हो चुकी है, जिससे उनका भविष्य अंधकार में है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और कंपनियों से शिकायत की गई, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और टेलीकॉम कंपनियों से मांग की है कि गांव में जल्द से जल्द नया मोबाइल टावर स्थापित किया जाए। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का जल्द निपटारा नहीं हुआ, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करने के लिए मजबूर होंगे।
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