खूंटी
झारखंड की होनहार बेटी रूपम सोनाली ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं-13वीं संयुक्त परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 268वीं रैंक हासिल की है। महज 22 वर्ष की उम्र में सफलता प्राप्त कर वह इस परीक्षा में सफल होने वाली सबसे कम उम्र की अभ्यर्थियों में शुमार हो गई हैं।
रूपम की सफलता की कहानी सिर्फ एक परीक्षा में सफल होने की नहीं, बल्कि कठिन हालातों से जूझते हुए अपने लक्ष्य को हासिल करने की मिसाल है। उनके पिता झारखंड वित्त सेवा में कार्यरत थे, जिनका 2013 में हृदयगति रुकने से निधन हो गया। इसके बाद 2016 में कैंसर के कारण उनकी माँ का भी निधन हो गया। इन दुखद घटनाओं के बावजूद रूपम ने हिम्मत नहीं हारी।

उन्होंने बिना किसी कोचिंग के, केवल सेल्फ स्टडी के जरिए (प्रतिदिन 6-8 घंटे पढ़ाई कर) JPSC की तैयारी की। आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद उन्होंने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई और अन्य खर्चों का स्वयं प्रबंध किया। JPSC इंटरव्यू की तैयारी के लिए उन्होंने केवल उड़ान IAS संस्थान से मार्गदर्शन प्राप्त किया। उनकी मेहनत और संकल्प को देखते हुए उड़ान IAS के निदेशक अरुण अग्रवाल ने स्वयं खूँटी जाकर रूपम को सम्मानित किया। उन्हें पौधा, झारखंड सामान्य अध्ययन की पुस्तक और ₹11,000 की सम्मान राशि भेंट की गई।
अरुण अग्रवाल द्वारा चलाए जा रहे इस विशेष सम्मान अभियान का उद्देश्य ऐसे प्रतिभाशाली और संघर्षशील अभ्यर्थियों को प्रोत्साहन देना है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद सिविल सेवा परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। इससे पहले भी वह बबीता पहाड़िया (दुमका), विष्णु मुंडा (हजारीबाग) और सचिन उराँव जैसे अभ्यर्थियों को सम्मानित कर चुके हैं। रूपम की यह सफलता न केवल उनके दृढ़ निश्चय और परिश्रम का परिणाम है, बल्कि राज्य भर के उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में भी बड़ा सपना देखने का साहस रखते हैं।
