द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में आदिवासियों के 30 वर्षों का संघर्ष बीते वर्ष समाप्त हुआ। हेमंत सरकार ने तय किया कि नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज में बंदूक की गोलियों की तड़तड़ाहट नहीं सुनाई दे। इसके लिए सीएम हेमंत सोरेन नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज के समय विस्तार के प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। 1964 में शुरू हुए नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज का तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा 1999 में अवधि विस्तार किया गया था. मुख्यमंत्री ने जनहित को ध्यान में रखते हुए नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित नहीं करने के प्रस्ताव पर सहमति प्रदान की थी। मगर इन दिनों तेजी से अफवाह फैल रही है कि सरकार ने नेतरहाट फायरिंग रेंज को रद्द नहीं किया है। जबकि, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश के बाद वर्ष 1994 से अबतक तोपाभ्यास बंद रहने एवं लंबी अवधि से हजारों ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए The Manoeuvres field Firing and Artillery Practice Act, 1938 एक्ट Chapter II के कंडिका-9 के आलोक में नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित करने के प्रस्ताव को राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2022 में अस्वीकृत कर दिया गया था।

फैलाई जा रही सूचना निराधार
मीडिया और सोशल मीडिया में माध्यम से फैलाई जा रही है कि नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज रद्द नहीं हुआ है। इसको लेकर सरकार की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि राज्य सरकार के पत्रांक-582, दिनांक-29.08.2022 एवं पत्रांक-376, दिनांक- 14.06.2022 में स्पष्ट उल्लेख है कि नेतरहाट फिल्ड फायरिंग रेंज को पुनः अधिसूचित करने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री के आदेश पर अस्वीकृत कर दिया गया है। ऐसे में अब यहां राज्य सरकार के निर्णय के उपरांत किसी तरह का सैन्य अभ्यास हजारों ग्रामीणों की भावनाओं को देखते हुए नहीं किया जाएगा।

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