मेदिनीपुर
पलामू जिले में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत चयनित बच्चों को अब तक विद्यालय में प्रवेश नहीं मिलने का मामला सामने आया है। सुशीला कुमारी पासवान जो की बेरिया की रहने वाली अभिभावक हैं, का आरोप है कि उन्होंने समय पर ऑनलाइन आवेदन किया था और सभी आवश्यक दस्तावेज भी जमा किए थे। महीनों बीत जाने के बाद भी बच्चों का नामांकन नहीं हो सका। बता दें कि अधिसूचना में झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा RTE Act, 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत निजी विद्यालयों में 25% आरक्षित सीटों पर प्रवेश के नियम बताए गए हैं।

मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
* सबसे पहले विद्यालय से 1 किलोमीटर की दूरी के भीतर रहने वाले पात्र बच्चों को प्रवेश मिलेगा।
* यदि 1 किमी के अंदर पर्याप्त बच्चे नहीं मिलते हैं, तो 3 किलोमीटर तक के बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा।
* इसके बाद भी सीटें खाली रहें तो 6 किलोमीटर तक के बच्चों को नामांकित किया जाएगा।
अगर ये प्रक्रिया फेल होजाये गा तब लॉटरी सिस्टम को उपाय किया जाता है।

गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय, शिक्षा मंत्री तथा जिला शिक्षा पदाधिकारी तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। आवेदन में अंबुजा पांडेय पर मनमानी, आदेशों की अनदेखी तथा गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं,जिनकी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल RTE अधिनियम की भावना के विरुद्ध होगा, बल्कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार का भी उल्लंघन माना जाएगा। सरकार समय-समय पर RTE के तहत 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश जारी करती है।
अब देखने वाली बात होगी कि पलामू जिला शिक्षा विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और दोनों बच्चों को RTE के तहत उनका वैधानिक प्रवेश कब तक दिलाया जाता है। यदि यह मामला अभी भी लंबित है, तो अभिभावक राज्य स्तर पर अपील और शिकायत दर्ज करा सकते हैं। झारखंड में RTE से संबंधित अपील और शिकायत की व्यवस्था उपलब्ध है तथा प्रथम और द्वितीय अपीलीय प्राधिकारी भी निर्धारित हैं।
