जामताड़ा:
द फॉलोअप के द्वारा ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने का एक बार फिर बड़ा असर देखने को मिला है. बीते 25 मई को जामताड़ा के डेराडीह गांव में पानी के लिए मचे त्राहिमाम को लेकर एक खबर प्रकाशित की गई थी. खबर का शीर्षक था "डेराडीह गांव डोभा का दूषित पानी पीने को मजबूर; शोपीस बनी जलमीनार". इस खबर के सामने आते ही प्रशासन और संबंधित विभाग तुरंत हरकत में आ गया.
खबर का असर, युद्ध स्तर पर काम शुरू
खबर प्रकाशित होने के अगले ही दिन, यानी 26 मई को विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए मिस्त्रियों की टीम को मौके पर भेजा गया. वर्तमान में डेराडीह और नजदीकी पुराना टोला गांव में खराब पड़े चापाकलों और सोलर जलमीनार की मरम्मत का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है. कई महीनों से भीषण जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए यह बड़ी राहत लेकर आया है.

क्या था पूरा मामला?
बता दें जामताड़ा प्रखंड के पंजानिया पंचायत अंतर्गत डेराडीह एक आदिवासी बहुल गांव है। यहां कहने को चार चापाकल और एक जलमीनार थे, लेकिन दो चापाकल पूरी तरह खराब थे और बाकी दो से बेहद कम पानी आ रहा था. जलमीनार भी महीनों से शोपीस बनी हुई थी. स्थिति इतनी बदतर थी कि ग्रामीण दूषित डोभा का पानी पीने को मजबूर थे. यही हाल पास के पुराना टोला गांव का भी था. वहां चार में से तीन चापाकल खराब थे. एकमात्र चालू चापाकल पर सुबह 4 बजे से ही लाइन लग जाती थी. पानी की भारी किल्लत के कारण लोग कई दिनों तक स्नान तक नहीं कर पा रहे थे.
ग्रामीणों ने जताया 'द फॉलोअप' का आभार
गावों में मिस्त्रियों के पहुंचते ही महिलाओं और स्थानीय लोगों के चेहरे खिल उठे हैं. ग्रामीणों ने 'द फॉलोअप' को धन्यवाद देते हुए कहा कि वे उम्मीद खो चुके थे कि कभी उनकी यह समस्या दूर होगी. लेकिन इस प्रयास ने उनकी सालों पुरानी तकलीफ का अंत कर दिया है.
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