रांची
झारखंड सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री, राधाकृष्ण किशोर, ने आज रांची के अमलतास बैंक्वेट हॉल में आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'उत्पादन हैंडबुक: ग्रामीण उत्पादन की प्रारंभिका' का विमोचन किया। विमोचन के दौरान झारखण्ड में कृषि की बहुआयामी चुनौतियों पर अतिथियों ने अपने विचार रखे। छोटी जोत, सिंचाई की स्थिति, तकनीकी जानकारी का अभाव, किसान सहकारी संगठन का अभाव, कमजोर मूल्य श्रृंखलाएं एक कुचक्र की तरह किसानों को घेरे हुए हैं। ऊपर से आसन्न जलवायु संकट को ले कर यदि समेकित प्रयास नहीं किये गए तो किसान टूट जाएंगे। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि ग्रासरुट प्रसार, प्रयोग और किसानों के सहकारी संगठनों के सहयोग से उत्पादकता और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।
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मुख्य अतिथि राधाकृष्ण किशोर ने अपने सम्बोधन में कहा कि झारखंड हर क्षेत्र में विकास की पात्रता और अधिकार रखता है. हमारे राज्य में जमीन के ऊपर अतुल्य जल और जंगल है तो जमीन के नीचे 40% खनिज हैं. हम सुनिश्चित करते हैं कि झारखंड के किसान के कल्याण के लिए हम वित्त की कमी नहीं होने देंगे. पूर्व सांसद और उद्यमी महेश पोद्दार ने इस बात पर बल दिया कि कैसे कृषि का बाजार नेटवर्क सुधारा जाए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि विपणन की व्यवस्था नहीं सुधरी तो किसान खेती से दूर होते जायेंगे।
आईसीएआर, प्लांडू के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवेंद्र कुमार ने झारखण्ड में कृषि की तकनीकी चुनौतियों और समाधान पर अपना मत रखा। उन्होंने कहा कि हमें सोचना होगा कि आखिर क्यों सिक्किम का किसान उतनी भूमि से 21000 रुपये कमाता है और झारखंड के किसान सिर्फ 6000 रुपये।

पुस्तक का संपादन कृषि जानकार पंकज कुमार और सौरभ पाठक ने किया है । संस्था के निदेशक कुमार देवाशीष ने बताया कि यह पुस्तक किसान संगठनों, उत्पादक समूहों और प्रसार कार्यकर्ताओं को निःशुल्क दी जायेगी। इस पुस्तक को उन्होंने आईएसडीजी रिसर्च फाउंडेशन की उत्पादन, उद्यमिता और सहकार की कड़ी का दूसरा पुस्तक बताया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में धीरेन्द्र कुमार, अयोध्यानाथ मिश्र, दीपांकर पांडा, अशोक कुमार, कैलाश कांडपाल, हलधर महतो ने विशेष रूप से भाग लिया। मंच संचालन स्नेहा कुमारी ने और धन्यवाद ज्ञापन आशीष बर्मन ने किया।
