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क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं का संरक्षण, संवर्द्धन और विकास हो, संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित होंः मोर्चा

क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं का संरक्षण, संवर्द्धन और विकास हो, संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित होंः मोर्चा

द फॉलोअप डेस्क, रांचीः

Jharkhand Tribal News: जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा के आह्वान पर आज राजधानी रांची में झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन, विकास और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर एक विशाल भाषा मार्च निकाला गया। इस ऐतिहासिक मार्च में काफी में संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, भाषा प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। राज्य के विभिन्न जिलों से लगभग 30 कॉलेजों के छात्र-छात्राएं इस मार्च में शामिल होने पहुंचे। भाषा मार्च की शुरुआत मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से हुई। फिर अल्बर्ट एक्का चौक होते हुए भगवान बिरसा मुंडा के समाधि स्थल तक गया। मार्च के दौरान प्रतिभागियों ने झारखंड की मातृभाषाओं के सम्मान, भाषा आधारित शिक्षा व्यवस्था लागू करने, भाषाओं के संरक्षण तथा सरकारी स्तर पर इनके समुचित विकास की मांग उठाई।

हमारी पहचान खनिज और प्राकृतिक संपदा से नहीं भाषा, संस्कृति और परंपराओं से भी हैः बंधु तिर्की

इस अवसर पर पूर्व शिक्षा मंत्री श्री बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड की पहचान केवल यहां की भौगोलिक सीमाओं, खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से नहीं है, बल्कि यहां की समृद्ध जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक विरासत से है। किसी भी समाज की भाषा उसकी आत्मा होती है। भाषा के माध्यम से ही एक पीढ़ी अपने पूर्वजों के ज्ञान, इतिहास, संस्कृति, परंपरा और जीवन दर्शन को अगली पीढ़ी तक पहुंचाती है। इसलिए झारखंड की भाषाओं की उपेक्षा वास्तव में झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत की उपेक्षा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में संथाली, मुंडारी, हो, कुड़ुख, खड़िया, नागपुरी, खोरठा, कुरमाली, पंचपरगनिया सहित अनेक भाषाएं बोली जाती हैं। इन भाषाओं में लोकगीत, लोककथाएं, कहावतें, पारंपरिक ज्ञान, साहित्य और जीवन के अनुभवों का विशाल भंडार मौजूद है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि इतनी समृद्ध भाषाई विरासत होने के बावजूद इनके विकास, प्रचार-प्रसार और शैक्षणिक विस्तार के लिए अपेक्षित संस्थागत व्यवस्था नहीं बन पाई है।

जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा बचाओ मोर्चा ने सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं

1. झारखंड की सभी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं विकास के लिए प्रभावी भाषा नीति लागू की जाए।
2. राज्य में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा अकादमी की स्थापना की जाए, ताकि सभी भाषाओं के साहित्य, संस्कृति और शोध को संस्थागत संरक्षण मिल सके।
3. प्राथमिक शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक मातृभाषा में पढ़ाई की समुचित व्यवस्था की जाए।
4. विभिन्न जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के लिए स्वीकृत एवं आवश्यक शिक्षकों के रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए।
5. प्रत्येक भाषा के विकास के लिए अलग-अलग बजट का प्रावधान किया जाए।
6. जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्यकारों, लेखकों, कवियों, लोक कलाकारों और शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन एवं सम्मान दिया जाए।
7. विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में इन भाषाओं की पढ़ाई, शोध और अध्यापन की बेहतर व्यवस्था की जाए।
8. झारखंड की भाषाओं के लोक साहित्य, लोकगीत, लोककथाओं, पारंपरिक ज्ञान और मौखिक इतिहास का दस्तावेजीकरण किया जाए।
9. सरकारी योजनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों और जनसंपर्क माध्यमों में झारखंडी भाषाओं को उचित स्थान दिया जाए।
10. भाषा संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और भाषा प्रतिनिधियों की भागीदारी से स्थायी व्यवस्था विकसित की जाए।

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