हजारीबाग:
Hazaribagh News: देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है। कहीं मतदाता सूची पर सवाल उठ रहे हैं, तो कहीं विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी बीच झारखंड के हजारीबाग जिले से वोटर आईडी से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसने सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बरही एसडीओ कार्यालय में पदस्थापित बड़ा बाबू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वोटर आईडी में सुधार के नाम पर कथित तौर पर पैसे लेते दिखाई देने का आरोप है।

'ऑफिस आए हो तो कुछ ना कुछ तो देना पड़ेगा ना!'
वायरल वीडियो में बड़ा बाबू आवेदक से कहते सुनाई देते हैं, "ऑफिस आए हो तो कुछ ना कुछ तो देना पड़ेगा ना!" इस पर आवेदक अपनी मजबूरी बताते हुए कहता है कि उसके पास पैसे नहीं हैं। हालांकि, बड़ा बाबू खर्चा के नाम पर कुछ देने की बात दोहराते नजर आते हैं। बातचीत के दौरान आवेदक 100 रुपये का नोट टेबल पर रखता है, जिसे वीडियो में बड़ा बाबू उठाकर अपनी जेब में रखते दिखाई देते हैं। इसके बाद आवेदक को दस्तावेज सौंप दिए जाते हैं।

वोटर आईडी में सुधार के लिए भी 'खर्चा-पानी'?
वायरल वीडियो में दिखाई दे रही बातचीत सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों के साथ होने वाले व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े करती है। सवाल यह है कि क्या सरकारी दफ्तर में अपना काम कराने पहुंचे आम आदमी को जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के साथ 'खर्चा-पानी' का इंतजाम भी करना पड़ेगा? कम से कम वायरल वीडियो में बातचीत कुछ ऐसा ही संदेश देती नजर आ रही है। विडंबना यह है कि मामला वोटर आईडी से जुड़ा है। मतदाता पहचान पत्र वह दस्तावेज है, जिसके जरिए नागरिक अपने लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करता है। ऐसे में इससे संबंधित काम के बदले पैसे मांगने का आरोप व्यवस्था की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। मामला सिर्फ ₹100 का नहीं, बल्कि सरकारी कार्यालयों में नागरिकों के प्रति जिम्मेदारी और पारदर्शिता का भी है।

बड़ा बाबू ने दी सफाई, SDO ने जांच का दिया भरोसा
वहीं, वायरल वीडियो को लेकर बड़ा बाबू ने अपनी सफाई में कहा है कि पैसे एफिडेविट और अधिवक्ता के हस्ताक्षर कराने के लिए लिए गए थे। दूसरी ओर, बरही एसडीओ जोहन टूडू ने मामले की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता से जांच करता है। जांच में वायरल वीडियो में दिखाई दे रही बातचीत, पैसे के लेन-देन और संबंधित प्रक्रिया की वास्तविकता सामने आना जरूरी है, ताकि मामले की पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सके।

100 रुपए का सवाल, सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही
सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए होते हैं, न कि जनता की जेब से 'खर्चा-पानी' निकालने के लिए। ₹100 की रकम भले ही छोटी हो, लेकिन सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर उठने वाला सवाल छोटा नहीं है। अब निगाहें प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।