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राज्यसभा चुनाव में हार से बौखलाई कांग्रेस, भाजपा पर लगा रही बेबुनियाद आरोप : आदित्य साहू

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द फॉलोअप डेस्क

राज्यसभा चुनाव के परिणाम को लेकर कांग्रेस द्वारा भाजपा पर लगाए गए आरोपों का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने तीखा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अभी तक चुनावी हार के सदमे से बाहर नहीं निकल पाई है और इसी वजह से वह आत्ममंथन करने के बजाय भाजपा पर निराधार आरोप लगा रही है।

आदित्य हू ने कहा कि कांग्रेस की स्थिति ऐसी हो गई है कि लगातार राजनीतिक झटकों के बावजूद वह सत्ता से चिपके रहने की मानसिकता नहीं छोड़ पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में रहते हुए कांग्रेस जनता के हितों की बजाय राजनीतिक लाभ लेने में अधिक रुचि रखती है जबकि राज्य की जनता कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और विकास संबंधी समस्याओं से जूझ रही है।

लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का कांग्रेस का पुराना इतिहास  

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का इतिहास कांग्रेस का रहा है, जबकि भाजपा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस के सूटकेस और धनबल की राजनीति संबंधी आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि देश जानता है कि ऐसी राजनीति किस दल की पहचान रही है।

परिमल नाथवानी को बाहरी प्रत्याशी बताए जाने पर भी साहू ने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि नाथवानी पहले भी झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और राज्य के विकास में उनकी भूमिका रही है। वहीं कांग्रेस ने खुद चुनावी प्रक्रिया में दूसरे राज्यों के नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं, जिससे उसके स्थानीय नेतृत्व पर भरोसे को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

पार्टी कार्यकर्ता को ही राज्यसभा भेजना चाहती थी भाजपा 

आदित्य साहू ने कहा कि भाजपा ने पहले भी स्पष्ट किया था कि पार्टी किसी कार्यकर्ता को राज्यसभा भेजना चाहती थी, लेकिन संख्या बल की स्थिति अलग थी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने किसी प्रकार की जोड़-तोड़ की राजनीति नहीं की। नाथवानी को समर्थन देन का निर्णय राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया।

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस अपने सहयोगी विधायकों को एकजुट नहीं रख पाई तो इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में विधायकों ने अपनी अंतरात्मा और राष्ट्रहित को ध्यान में रखकर मतदान किया है तथा कांग्रेस को दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी राजनीतिक स्थिति और रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए।

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