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जाते-जाते 9 साल की मीशा रोशन कर गई 2 जिंदगियां, मां के फैसले को सलाम

जाते-जाते 9 साल की मीशा रोशन कर गई 2 जिंदगियां, मां के फैसले को सलाम

द फॉलोअप डेस्क, रांचीः

रामगढ़ जिले के घाटोटांड़ निवासी नौ वर्षीय मिशा थैलेसीमिया से जूझते हुए जिंदगी की जंग हार गई, लेकिन जाते-जाते वह किसी की दुनिया रोशन करने की वजह बन गई। बेटी की मौत के बाद मां सविता देवी ने उसका नेत्रदान करने का फैसला लिया। मां का कहना था कि जब तक बेटी जीवित थी, लोग रक्तदान कर उसकी जिंदगी बचाने की कोशिश करते रहे, अब उसकी आंखें किसी दूसरे की दुनिया रोशन करेंगी। मां के इस फैसले ने अस्पताल में मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। मिशा रामगढ़ जिले के घाटोटांड़ निवासी महेश महतो की बेटी थी। थैलेसीमिया के कारण उसे नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती थी। 3 नवंबर को ही उसे ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद घर लाया गया था, लेकिन अगले दिन उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। मां सविता देवी ने समाजसेवी अंकित राजगढ़िया को फोन कर बच्ची की गंभीर हालत की जानकारी दी। उनकी पहल पर मिशा को धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल लाया गया। बुधवार दोपहर करीब दो बजे गंभीर हालत में भर्ती बच्ची को तत्काल पीआईसीयू में शिफ्ट किया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद कार्डियक अरेस्ट से उसकी मौत हो गई।

बेटी की आंखों से किसी और की जिंदगी में आएगा उजाला

बेटी को खोने के बाद सविता देवी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। इसी बीच समाजसेवी अंकित राजगढ़िया ने उन्हें नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। गम की इस घड़ी में मां ने बेटी की आंखें दान करने की सहमति दी। उनका कहना था कि मिशा के नेत्रदान से किसी दूसरे व्यक्ति की दुनिया रोशन होगी और उनकी बेटी हमेशा अमर रहेगी। इसके बाद अस्पताल के नेत्र विभाग की टीम ने कॉर्निया सुरक्षित रखने की प्रक्रिया पूरी की। इस कार्य में नेत्र विभाग के एचओडी डॉ. धर्मेंद्र कुमार के साथ अशोक, मनोज और संदीप की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नेत्रदान के बाद पीडियाट्रिक्स विभाग के वार्ड बॉय, नर्सों और पैरामेडिकल विद्यार्थियों ने मासूम को सलामी देकर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। अस्पताल का माहौल गमगीन हो गया।

मददगार भी हुए भावुक, प्रशासन ने घर पहुंचाने की कराई व्यवस्था

मिशा के इलाज के दौरान मदद में जुटे समाजसेवी अंकित राजगढ़िया ने कहा कि बच्ची उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गई थी। महज दो दिन पहले ही उनसे मिशा की बातचीत हुई थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी वह दुनिया छोड़ जाएगी। उन्होंने मां सविता देवी के साहस और नेत्रदान के फैसले को सलाम किया। वहीं, बच्ची के शव को रामगढ़ जिले के घाटोटांड़ स्थित घर ले जाने के लिए धनबाद उपायुक्त आदित्य रंजन की ओर से एंबुलेंस की व्यवस्था कराई गई।

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