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कागज के अविष्कार से भी पुराना है आदिवासियों का इतिहास- कल्पना मुर्मू सोरेन

कागज के अविष्कार से भी पुराना है आदिवासियों का इतिहास- कल्पना मुर्मू सोरेन

द फॉलोअप डेस्क, रांची:

Jharkhand News: गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन (Kalpana Murmu Soren) ने कहा कि भारत का संविधान भी हमारी ओलचिकि लिपि को मान्यता देता है, क्योंकि जब दुनिया में कागज का आविष्कार भी नहीं हुआ था, आदिवासियों का इतिहास उससे भी पुराना है। हमें अपना अस्तित्व स्पष्ट करने के लिए किसी कागज की आवश्यक्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि आज एसआईआर प्रक्रिया के तहत अधिकारी आते हैं और आदिवासियों से उनका कागज मांगते हैं। टेक्नोलॉजी आ गई है जिसमें मरांडी को मरडी लिख दिया जाता है और मतदाता सूची से संबंधित व्यक्ति का नाम काट दिया जाता है। सवाल है कि इसका जिम्मेदार कौन है। 

हक-अधिकार के लिए लड़ना जानता है आदिवासी!
कल्पना मुर्मू सोरेन ने कहा कि हक और अधिकार के लिए कैसे लड़ना है, यह बात आदिवासियों को सिखाने की आवश्यक्ता नहीं है। ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ सबसे पहले आदिवासियों ने ही विद्रोह किया था, जबकि संसाधन के नाम पर उनके हाथों में केवल तीर-कमान थी। कल्पना मुर्मू सोरेन ने कहा कि तीर-कमान आदिवासी समाज का मान, अभिमान, स्वाभिमान और अस्तित्व की पहचान है। सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव, बिरसा  मुंडा और तिलका मांझी ने तीर कमान की बदौलत ही अंग्रेजों के खिलाफ जल, जंगल और जमीन की लड़ाई लड़ी थी। कल्पना मुर्मू सोरेन ने कहा कि हमारी यह गुजारिश है कि आदिवासी समाज को दोबारा उनके हक-अधिकार के लिए तीर-कमान उठाने पर मजबूर नहीं किया जाए। 

झारखंड के लिए हजारों लोगों ने त्याग किया है
गांडेय विधायक ने कहा कि झारखंड हमें आसानी से नहीं मिला है। दिशोम गुरुजी के साथ हजारों क्रांतिकारियों ने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए घर-परिवार छोड़ा, जेल गए और लाठियां खाईं। सबने त्याग किया। अब झारखंड को बचाने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हमारी है। हमें जुड़कर रहना होगा। कल्पना मुर्मू सोरेन ने एकता का आह्वान करते हुए कहा कि उंगली कमजोर होती है लेकिन मुक्का ताकतवर होता है। 

धोरोमगाड़ महासम्मेलन में शामिल होंगे सीएम
गौरतलब है कि 4-5 नवंबर को गिरिडीह के मधुबन थानाक्षेत्र अंतर्गत पारसनाथ पहाड़ी, जिसे कि आदिवासी समाज मरांग बुरु कहता है, के पास मरांग बुरु बचाओ समिति द्वारा 2 दिवसीय धोरोमगाड़ महासम्मेलन का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में मरांग बुरु को बाहरी अतिक्रमण से मुक्त कराने और आदिवासी आस्था को संरक्षित करने की दिशा में पहल पर चर्चा होगी। 5 नवंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे, जिसकी पुष्टि उनकी धर्मपत्नी और गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने भी की है। 

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