रांची
पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से गांव में आने वालों को ग्राम सभा के निर्णय के आधार पर रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय ने पेसा अधिनियम के तहत ग्राम सभाओं के अधिकार को बरकरार रखा है, जो आदिवासी संस्कृति की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
रघुवर दास ने कहा कि न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से गांव में प्रवेश करता है, तो पेसा अधिनियम के तहत ग्राम सभा को उसे रोकने का अधिकार है। उन्होंने इस फैसले को स्वागतयोग्य बताते हुए कहा कि इससे धर्म परिवर्तन के नाम पर चल रहे गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।

उन्होंने झारखंड के सभी मानकी, मुंडा, पडहा, परगनैत समेत पारंपरिक ग्राम प्रधानों से अपील की कि वे भी ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर गांव के बाहर बोर्ड लगाएं, ताकि बाहरी लोगों की गतिविधियों पर नियंत्रण रखा जा सके। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए यह कदम जरूरी है।
रघुवर दास ने यह भी कहा कि यदि समय रहते समाज सजग नहीं हुआ तो भविष्य में संस्कृति और परंपराओं को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से इस निर्णय को दृढ़ता से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि यह फैसला आदिवासी स्वशासन की अवधारणा को मजबूत करता है और ग्राम सभाओं को उनके वैधानिक अधिकारों के प्रयोग की स्पष्ट मान्यता देता है।
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