रांची:
आईजी पंकज कंबोज की अध्यक्षता वाली 9 सदस्यीय एसआईटी झारखंड में ट्रेजरी घोटाले की जांच करेगी। इस टीम में 1 डीआईजी, 2 एसपी, 3 डीएसपी और 2 इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी शामिल होंगे। ट्रेजरी घोटाले की जांच के लिए हेमंत सरकार ने 2 स्तरीय जांच प्रणाली अपनाई है, जिसमें पहला आईजी पंकज कंबोज के नेतृत्व वाली टीम है जो मुख्य रूप से घोटाले के आपराधिक पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच-पड़ताल करेगी। इसमें अवैध निकासी के पीछे छिपे सिंडिकेट, फर्जी दस्तावेजों का खेल और इसमें शामिल सफेदपोश अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा।
दूसरी टीम आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित की गई है, जो वित्त विभाग के स्तर पर बनी है। यह कमिटी इस बात की पड़ताल करेगी कि ट्रेजरी सॉफ्टवेयर में किन खामियों का फायदा आरोपियों ने उठाया।

फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी जांच
बताया जा रहा है कि एसआईटी जांच का दायरा महज फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा। तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता से सॉफ्टवेयर की सुरक्षा में हुई चूक और सेंधमारी की पड़ताल भी की जाएगी। यह भी जांच का विषय है कि घोटाला केवल कुछ क्लर्कों की मिलीभगत का नतीजा है या इसके पीछे पूरा नेक्सस काम पर लगा था। ट्रेजरी के सुरक्षित समझे जाने वाले सॉफ्टवेयर में कैसे सेंधमारी हो गई और किसने कट कमीशन का खेल खेला, इसकी भी जांच होगी।
बोकारो-हजारीबाग समेत कई जिलों में गड़बड़ी
गौरतलब है कि झारखंड के बोकारो और हजारीबाग समेत कई जिलों में ट्रेजरी से अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। बोकारो में एसपी कार्यालय में लेखा शाखा के लेखपाल अभी मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है। यहां ट्रेजरी से करीब 6 करोड़ रुपये की निकासी की गई, जबकि हजारीबाग में पुलिस विभाग के 3 सिपाहियों के द्वारा करीब 30 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसे गंभीरता से लिया है।