द फॉलोअप डेस्क
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के रांची स्थित आवास पर रविवार को दिनभर गहमागहमी का माहौल रहा। उनके विधानसभा क्षेत्र छत्तरपुर और पलामू के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, समर्थक और शुभचिंतक उनसे मिलने पहुंचे। समर्थकों ने बताया कि अखबारों में मंत्री की सुरक्षा को लेकर प्रकाशित खबरों के बाद वे उनकी सुरक्षा और समर्थन के लिए पहुंचे हैं। देर शाम तक मंत्री आवास पर लोगों का आना-जाना जारी रहा। हालांकि मंत्री ने सभी समर्थकों को समझाकर वापस भेज दिया और कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में कोई उनके साथ न आए। रविवार को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर महानगर कांग्रेस के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में कॉर्निवेल हॉल पहुंचे। इसके बाद वह एचईसी परिसर स्थित पारस अस्पताल भी गए। पूरे दिन मंत्री बिना सुरक्षा घेरे के नजर आए, जबकि उनकी सुरक्षा में तैनात स्पेशल ब्रांच और जैप के जवान दूर से उनकी गतिविधियों और आवास पर आने-जाने वालों पर नजर बनाए रहे। बारिश के बावजूद सुरक्षा कर्मी सड़क किनारे तैनात रहे।

संयुक्त सचिव के नोटिस पर वित्त सचिव से मांगी रिपोर्ट
वित्त मंत्री ने चार जुलाई को वित्त सचिव प्रशांत कुमार को पत्र लिखकर विभाग के संयुक्त सचिव पंकज सिंह द्वारा सरकारी वाहन लौटाने संबंधी नोटिस जारी किए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा है कि किस प्रावधान और अधिकार के तहत यह नोटिस भेजा गया। यदि यह पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जारी हुआ है तो उसका आदेश भी उपलब्ध कराया जाए। मंत्री ने पूरे मामले की जांच कर 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट देने तथा संबंधित अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

सरकार से कोई नाराजगी नहीं
राधाकृष्ण किशोर ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार से कोई नाराजगी नहीं है और वह केवल प्रशासनिक व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि एक मंत्री द्वारा डीजीपी को भेजे गए पत्र का महीनों तक जवाब नहीं मिलता और एक संयुक्त सचिव सीधे मंत्री को वाहन लौटाने का नोटिस भेज देता है, तो यह राजकीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन सरकार में अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र में रहकर काम करना होगा और व्यवस्था की गरिमा बनाए रखनी होगी।