द फॉलोअप डेस्क, गिरिडीह:
डुमरी प्रखंड की अटकी पंचायत स्थित बंगाली टोला में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चल रहे सड़क सुदृढ़ीकरण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने निर्माण में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए काम की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। इस मामले में स्थानीय मुखिया और उपमुखिया ने भी ग्रामीणों का समर्थन किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि उच्च विद्यालय के पास सड़क के कुछ हिस्सों में जरूरी तैयारी किए बिना ही पीसीसी ढलाई कर दी गई। आरोप है कि कई जगह जमीन को ठीक से समतल करने और सोलिंग की प्रक्रिया पूरी किए बिना निर्माण आगे बढ़ाया गया। स्थानीय लोगों को आशंका है कि इस तरह सड़क तैयार होने से उसकी मजबूती और टिकाऊपन प्रभावित हो सकता है।

सरकारी योजना में गुणवत्ता से समझौता नहीं
सड़क के ब्लैक टॉप कार्य को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण में अलकतरा की मात्रा पर्याप्त नहीं रखी जा रही जिससे सड़क की ऊपरी सतह के जल्दी खराब होने की आशंका है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजना के तहत हो रहे काम में गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
शिकायत सामने आने के बाद निर्माण स्थल पर काम बंद होने की बात ग्रामीणों ने कही है। उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों से स्थल निरीक्षण कर निर्माण की गुणवत्ता और इस्तेमाल की जा रही सामग्री की जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों के आरोप को विभाग ने सही नहीं माना
हालांकि विभाग ने ग्रामीणों के आरोपों को सही नहीं माना है। संबंधित जेई सरोज मेहता ने कहा कि सड़क निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के आधार पर कराया जा रहा है और गुणवत्ता पर निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीणों द्वारा काम रोके जाने की जानकारी सही नहीं है। जेई के मुताबिक क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण फिलहाल निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है।

JE ने क्या बताया?
सड़क की लागत और लंबाई को लेकर पूछे जाने पर जेई सरोज मेहता ने बताया कि काम एक पैकेज के तहत कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पैकेज से जुड़ी पूरी जानकारी दस्तावेज देखने के बाद ही उपलब्ध कराई जा सकेगी। दूसरी ओर, संवेदक ने भी निर्माण कार्य ग्रामीणों द्वारा रोके जाने से इनकार किया।
उन्होंने कहा कि अगर किसी हिस्से में गुणवत्ता को लेकर शिकायत मिली है तो मौके पर तैनात कर्मचारियों से जानकारी लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। ग्रामीणों के आरोप और विभाग की सफाई के बाद अब पूरे मामले में आधिकारिक जांच अहम हो गई है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों का पालन हुआ है या नहीं।