नंदलाल तुरी/पाकुड़:
जमीन का मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर पचवारा कॉल ब्लॉक से विस्थापित रैयतों ने अब जमीन के अधिग्रहण और खनन पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। पचवारा सेंट्रल और नॉर्थ कॉल ब्लॉक के विस्थापित गांव के सैकड़ों महिला और पुरुष रैयतों ने समाहरणालय के समक्ष सोमवार को चौथे दिन भी धरना प्रदर्शन किया। रैयतों ने कहा कि हमारी जमीन पर कोयले का खनन तो कर दिया गया है, लेकिन हमें ना तो मुआवजा मिला और ना ही नौकरी। रैयतों ने सोमवार को कहा कि 30 मार्च 2015 को पचवारा सेंट्रल कोल ब्लॉक पंजाब स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड और नॉर्थ कोल ब्लॉक वेस्ट बंगाल पॉवर कॉरपोरेशन को आवंटित किया गया था, लेकिन कोल ब्लॉक के तहत आने वाली रैयती जमीन के अधिग्रहण संबंधी आदेश जारी नहीं किया गया था।

केंद्र और राज्य सरकार से अधिग्रहण की अनुमति नहीं
विस्थापितों का तर्क है कि राज्य और केंद्र सरकार से अनुमति मिले बिना रैयती जमीन का अधिग्रहण फर्जी तरीके से किया गया है। रैयतों ने कहा कि यहां अवैध ढंग से कोयले का खनन किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खतरनाक बारूद से आदिवासी जमीन को बलास्ट कर खनन किया जा रहा है। रैयत मोहन मुर्मू, दानियाल मुर्मू, कलम सोरेन, बुद्धिम सोरेन, रामलाल टुडू,चेतन हेंब्रम, दुलाल मरांडी ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या जिला प्रशासन ने हमारी जमीन का अधिग्रहण करने से पहले भारत सरकार या राज्य सरकार का कोई आदेश या पत्र देखा है। कॉल ब्लॉक में अधिग्रहण की गई जमीन से संबंधित कोई आदेश सरकार की ओर से जारी नहीं है तो फिर कैसे आदिवासी की जमीन एक अंजान कंपनी के नाम अधिग्रहण कर दी गई।

प्रदर्शनकारियों ने SPT एक्ट के उल्लंघन की बात की
26 दिसंबर 2001 और वर्तमान में भी कोल ब्लॉक आवंटन, जमीन की लीज और अधिग्रहण को रैयतों ने अवैध बताते हुए सवाल किया है कि किस मंत्रालय के आदेश पर जमीन का अधिग्रहण और खनन किया जा रहा है। उनका कहना है कि SPT एक्ट 69 में प्रावधान है कि किसी निजी कंपनी के नाम जमीन का अधिग्रहण नहीं होगा। एक्ट की धारा 72 के अनुसार संसद या राज्य सरकार जो कानूनी बनाएगी उसमें एसपीटी एक्ट का उल्लंघन नहीं करने का प्रावधान है। कॉल बेरिंग एक्ट 1957 के अनुसार सरकारी कंपनी के लिए जमीन का अधिग्रहण भारत सरकार करेगी, न कि राज्य सरकार। उनका दावा है कि वेस्ट बंगाल पॉवर कॉरपोरेशन और पंजाब स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन राज्य सरकार की कंपनी है।

विस्थापितों के हक में लंबी लड़ाई लड़ने का ऐलान
सामाजिक कार्यकर्ता मुन्नी हांसदा ने कहा कि हम विस्थापितों के हक में लंबी लड़ाई लड़ेंगे और लोगों को न्याय दिलाने का काम करेंगे। हमने रैयतों की आवाज को अनुसूचित जनजाति आयोग से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है। आगे हम रैयतों को न्याय दिला कर ही दम लेंगे।
हालांकि इस संबंध में डीसी मेघा भारद्वाज से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि रैयतों का मुआवजा से संबंधित भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर संचिका को पूर्व डीसी मनीष कुमार ने क्लोज कर दिया है। ऐसे में अब जमीन मुआवजा बकाया होने के बात प्रासंगिक नहीं लगती।