द फॉलोअप डेस्क
समय के अभाव की वजह से आपकी ट्रेनिंग शायद नहीं हो पाएगी। सीधे मोर्चे पर जाना होगा। लेकिन बीच में वक्त मिलेगा तो राज्य के अंदर या बाहर भेजकर आपको ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। ताकि, हम राज्य के अंदर आम लोगों को न्याय दिला पाए। ये बातें सीएम हेमंत सोरेन ने बुधवार को झारखंड अभियोजन सेवा के लिए चयनित सहायक लोक अभियोजकों (सरकारी वकील) को प्रोजेक्ट भवन, द्वितीय तल सभागार, धुर्वा में नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान कही। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि एक बात को भुला नहीं पाता हूं, शायद भुलाना भी मुमकिन नहीं होगा। अभी हाल के दिनों में देश के अंदर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया, सुप्रीम कोर्ट के बड़े-बड़े जज और गणमान्य लोगों की उपस्थिति में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी ने एक बात कही थी कि हमें जेल बनाने की क्या जरूरत, इसे कम करने की दिशा में काम क्यों नहीं कर रहे। मतलब स्पष्ट है कि वर्तमान समय में हमारे न्याय पालिका में केस पेंडिंग होने के कारण हमारे जेलों में कैदियों की संख्या बढ़ रही है। ये राज्य और देश के लिए बेहतर संकेत नहीं है। सीएम ने कहा कि हो सकता है कोई आपके आसपास का व्यक्ति बेगुनाह है, मगर जेल के अंदर है। बिना कोई जुर्म के सजा पाते हैं तो उनकी क्या मनोदशा होगी, यह समझा जा सकता है। इसलिए आप बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपना योगदान देने जा रहे हैं। डॉक्टर व वकील को लोग भगवान की तरह मानते हैं। इस विश्वास को बनाना और कायम रखना ये आपके हाथ में है।

लोगों को जागरूक करें, योजनाओं का दें लाभ
सीएम ने नव नियुक्त सरकारी वकीलों से कहा कि आप सरकार के अभिन्न अंग के रूप में काम करेंगे। झारखंड प्रदेश जहां आदिवासी, दलित और पिछड़ों का एक बड़ा वर्ग बसता है। यहां के लगभग आमजनों को तो कानूनी व्यवस्था, कानूनी नियम के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं हैं। ऐसे में उनको न्याय दिलाना, उनके पक्ष में खड़ा होना होगा। उनके लिए कोर्ट में दलीलें देना कितना आसान और कितना मुश्किल हो सकता है ये आपको अंदाजा होगा। मुझे जो जानकारी प्राप्त है उसके अनुसार राज्य के जेलों में बंद बहुत सारे गरीब ऐसे हैं जो पैसे के अभाव में न वकील कर पाते हैं और कोर्ट जाने में सक्षम हैं। हालांकि, सरकार उनके लिए कई तरह की योजना चलाती है। हमारे गांवों में लोगों को ये भी पता नहीं है कि सरकार वकील मुहैया कराती है। जिसका पूरा खर्च सरकार देती है उन्हें कोई खर्च नहीं देना पड़ा। ये प्रचार करना जरूरी है। ताकि लोग इसका लाभ उठा सकें।

कई गांव में हिंदी भी नहीं समझ पाते, स्थानीय भाषा का लें ज्ञान
सीएम ने कहा कि झारखंड का समाजिक ताना-बाना और भौगोलिक परिस्थित दूसरे राज्य से अलग है। क्योंकि, यहां के जिलों में अलग-अलग भाषा और रहन सहन से रहने वाले लोग हैं। बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं जहां के लोग हिंदी नहीं जानते। उन्हें सिर्फ अपनी मादरी भाषा आती है। आपको उनके साथ भी संवाद करना है। अगर आप उनके साथ संवाद नहीं बना पाएंगे तो उनको न्याय दिलाने में आपको काफी कठिनाइयां होगी। ऐसे में आपसे आग्रह है कि जिस क्षेत्र में जिस भाषा की बहुलता है उसे ध्यान में रखकर उसकी ट्रेनिंग लें। सुप्रीम कोर्ट- हाईकोर्ट में अंग्रेजी का प्रचलन अधिक है, लेकिन झारखंड में जो हिंदी नहीं जानता हो वह अंग्रेजी कैसे बोल सकेगा। उन्होंने मुख्य सचिव से कहा इनकी ट्रेनिंग में एक भाषा का भी विषय जरूर जोड़ें ताकि जब ये क्षेत्र में जाएं तो उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।

अभी और होंगी नियुक्तियां
बुधवार को 107 सहायक लोक अभियोजकों (सरकारी वकीलों) को नियुक्ति पत्र दिया गया। जिसमें से सांकेतिक रूप से सीएम ने 10 लोगों को अंगवस्त्र एवं नियुक्ति पत्र प्रदान किया। उन्होंने कहा कि जानकारी मिली है कि समय के अभाव की वजह से आपकी ट्रेनिंग नहीं हो पाएगी। सीधे मोर्चे पर जाना होगा। लेकिन बीच में वक्त मिलेगा तो राज्य के अंदर या बाहर भेजकर आपको ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। ताकि, हम राज्य के अंदर आम लोगों को न्याय दिला पाए। सीएम ने कहा कि अभी नियुक्ति पूरी नहीं हुई और भी लोक सहायक अभियोजक नियुक्त होने हैं। सरकार इस दिशा में प्रयासरत हैं। स्ट्रेंथ के अनुरूप नियुक्त करने की तैयारी है ताकि लोगों को न्याय मिल सके।

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